करनाल। जब वे पढ़ते थे उस समय स्कूल नया बना था और भवनों का निर्माण कार्य भी चल रहा था। स्कूल के पीछे गन्ने के खेत थे, जिनमें वह छिप कर रेड करने जाते थे और गन्ने उखाड़ कर लाते थे। उस समय की गई रेड सेना में भर्ती होने पर काम आई। जिससे उन्होंने दुश्मनों पर रेड कर उनके छक्के छुड़ाए।
1961 में सैनिक स्कूल कुंजपुरा में पढ़ने वाले, 1971 के युद्ध के वीर योद्धाआें ने अपने छात्र जीवन और युद्ध की यादें साझा करते हुए रविवार को पूर्व छात्र मिलन कार्यक्रम में ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि कपूरथला शिविर में जब जाते थे तो वहां छिपकर आम के बाग से बैग भरकर ले आते थे। एक बार पकड़े जाने पर उनकी पिटाई भी हुई थी। उन्होंने बताया कि जहां आकर वह हॉस्टल में रहे थे, वहां अब कमरे बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल में आकर सभी पुरानी यादें ताजा हो गईं और दोबारा से छात्र जीवन को महसूस कर रहे हैं। स्कूल में अब काफी बदलाव आया है और अच्छा भवन बना है लेकिन उस समय की हर वो जगह जहां हम रहे और खेले वह सब याद आ रहा है।
पाकिस्तान के कैदी उठ कर चले गए थे
1971 के युद्ध में विजयी होेने के बाद पाकिस्तान के कैदियों से मिलने गए तो वे शर्म के मारे उठकर चले गए, क्योंकि उन्होंने आत्मसमर्पण किया था।
-उमंग कपूर, मेजर जनरल
हमारी सेना धूल चटाने में माहिर
जब हम सेना में थे तब थोड़ा चीन से खतरा रहता था, लेकिन समय के साथ हमारी सेनाएं मजबूत हुई हैं जो किसी भी विरोधी को धूल चटाने में माहिर है।
-एके नंदा, लेफ्टिनेंट जनरल
वो दिन लौट कर नहीं आने वाले
जब छात्र थे तो यहां स्कूल भवन बन रहे थे। उस समय छिपकर पिक्चर देखने जाना याद आता है, क्योंकि वो दिन अब लौटकर नहीं आ सकते।
-प्रताप सिंह ढिल्लो, कर्नल
देश सेवा गौरव की बात
स्कूल के समय में बहुत मस्ती की, लेकिन सबसे सुखद देश की सेवा करना रहा। भारतीय सेना में होना मेरे लिए गौरव की बात है।
-डीडीएस संधू, लेफ्टिनेंट जनरल