भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जहां किसान मोर्चा बैठक करता है, वहां सरकार लॉकडाउन कर देती है। यदि ऐसा ही रहा तो भी किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। किसान कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सरकार ने कुछ लोगों के लिए ‘इंडिया फॉर सेल’ कर दिया है, परंतु देश की जनता अब जाग चुकी है।
टिकैत करनाल के असंध की अनाज मंडी में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि फसलों को मंडी के बाहर कहीं भी बेच लो। इसलिए अब किसान अपनी फसलों को पुलिस थानों, एसडीएम कार्यालयों, तहसीलों, डीसी व डीएम के कार्यालयों, विधानसभा और लोकसभा के बाहर गिराएगा और वहीं से एमएसपी की मांग करेगा।
महापंचायत में राकेश टिकैत, युद्धवीर सिंह, भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतन मान व प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने एक मंच पर आकर भाजपा सरकार को घेरा और किसान आंदोलन की मजबूती के लिए किसानों से एकजुट होने का आह्वान किया। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि प्रदेश में भाजपा और जजपा ने जनता के साथ धोखा किया है। जब भी दोनों पार्टियों के नेता गांवों में आएं, तो उनका विरोध करें।
युद्धवीर सिंह ने कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर पूछते हैं कि कानूनों में काला क्या है ? जब कानूनों में काला नहीं तो सरकार 18 संशोधन करने के लिए क्यों तैयार हुई। राकेश टिकैत ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल है। आंदोलन की वजह से करीब साढ़े तीन लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने कह दिया है कि जो इन नोटिस से डरता है बेशक वह आंदोलन में शामिल न हो। किसान इन नोटिस से डरने या घबराने वाले नहीं हैं। सरकार ने हर किसान नेता की प्रोफाइल तैयार कर रखी है। जो नेता किसान के पक्ष में बोलता है, तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
करनाल में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र नरवाल के आवास पर प्रेसवार्ता के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन नवंबर-दिसंबर तक चलेगा। सिंघु बॉर्डर पर गर्मी के मौसम को देखते हुए किसानों ने धरनास्थल पर कूलर का इंतजाम कर लिया है।
कांग्रेस के इशारे पर आंदोलन के सवाल पर टिकैत ने कहा कि कांग्रेस है ही नहीं। विपक्ष होता तो वो किसानों की आवाज उठाता। विपक्ष कमजोर है। वे बंगाल में गए थे और किसानों के लिए एमएसपी की मांग की थी। बंगाल चुनाव में फैसला वहां की जनता करेगी। वे बंगाल में किसी को जिताने नहीं गए थे। वहां की जनता को इतना कहा है कि जिसने तंग किया उसे वोट न दें। उन्होंने कहा कि वह करनाल के कैमला गांव में जरूर जाएंगे। इस गांव के लोग बहादुर हैं।