जींद की श्वेता 498 अंक के साथ प्रदेश कला संकाय में प्रथम है। छात्रा के पिता सुनील कुमार किसान हैं और मां नरेश कुमारी गृहिणी। श्वेता ने 12वीं की पढ़ाई के दौरान भी पिता के साथ खेत में हाथ बंटाया। उनके अभिभावकों को भी बेटी पर नाज है। छात्रा का कहना है कि दसवीं में 95 प्रतिशत अंक आने से वे टॉप-3 में आने से रह गई थी। इस बार बिना कोचिंग मेहनत करके तीन प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी के साथ सफलता पाई है। अब यूपीएससी की भी तैयारी कर रही हैं। आईएएस बनकर ग्रामीण स्तर की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना उद्देश्य है। अंक : 498/500, स्थान : प्रदेश में प्रथम, नाम : श्वेता , कक्षा : 12वीं, कला।
करनाल के अराईंपुरा निवासी मोहित ने 495 अंक से कला संकाय में प्रदेश में तृतीय स्थान प्राप्त किया। पंप कंपनी में मजदूरी करने वाले जिले सिंह के बेटे ने कभी ट्यूशन नहीं रखी। बड़ी बहन सेजल और कोमल ने अंग्रेजी विषय में मदद की और अन्य विषयों के लिए बेहतर पाठ्यसामग्री उन्हें यू-ट्यूब पर मिली, जहां से लेक्चर सुनकर उन्होंने नोट्स तैयार किए और करनाल में प्रथम स्थान प्राप्त किया। मोहित का आईएएस अधिकारी बनने का सपना है। इसके लिए उन्होंने तैयारी एक साल पहले शुरू कर दी थी, ऑनलाइन इसकी पढ़ाई भी कर रहे हैं। अंक : 495/500, स्थान : प्रदेश में तृतीय, नाम : मोहित, कक्षा : 12वीं, कला।
पानीपत के हेमंत ने कॉमर्स में 488 अंक के साथ प्रदेश में तीसरा स्थान पाया। कपड़े की फेरी लगाने वाले नवीन वर्मा के इस बेटे को पढ़ाई के तनाव ने वर्ष में कई बार बीमार भी किया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मेहनत को बरकरार रखा। दसवीं कक्षा में तो जिले में तीसरे स्थान पर थे। अब 12वीं में प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुंचे हैं। छात्र का एकाउंट्स विषय का शिक्षक बनने का सपना है। इस विषय में उसके 100 अंक हैं। हेमंत का कहना है कि पढ़ाने के तरीकों में सुधार हो तो गणित, एकाउंट्स और साइंस जैसे मुश्किल लगने वाले विषय भी आसान बनते हैं। अंक : 488/500, स्थान : प्रदेश में तृतीय, नाम : हेमंत, कक्षा : 12वीं, कॉमर्स।
पानीपत की चुलकाना निवासी तमन्ना 488 अंक से विज्ञान संकाय में प्रदेश में द्वितीय है। बिजली निगम के लाइनमैन पिता राजबीर सिंह की बेटी का कॉलेज प्रोफेसर बनने का सपना है। उनका कहना है कि दसवीं के परीक्षा परिणाम में वे जिले में चौथे नंबर पर थी, इस कारण वे सम्मानित नहीं हो पाई थी। उनकी दो साल पुरानी टीस अब अमर उजाला के मंच पर सीएम के हाथों सम्मानित होने पर पूरी हुई। छात्रा के फिजिक्स में 100 अंक हैं। छात्रा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता और पिता दोनों को दिया। छात्रा ने बताया कि उन्होंने सेल्फ स्टडी करके सफलता पाई है। अंक : 488/500, स्थान : प्रदेश में द्वितीय, नाम : तमन्ना, कक्षा : 12वीं, विज्ञान।
कैथल की मन्नत विज्ञान संकाय में 487 अंक के साथ प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। उसका इंजीनियर बनने का सपना है। इस साल कहीं दाखिला न लेकर वह जेईई की तैयारी ही कर रही है। वीडियो एडिटर सुरेंद्र पाल और गृहिणी रजनी की बेटी शाम से रात 12 बजे तक और सुबह चार बजे से छह बजे तक पढ़ती थी। मन्नत ने बताया कि सत्र की शुरुआत में हादसा होने पर उनकी मां के पैर में चोट लग गई थी। इस दौरान एक माह तक बेडरेस्ट पर रहीं। ऐसे समय में भी उनकी माता ने घर के काम के लिए उनकी पढ़ाई के टाइमटेबल को प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने सीएम के हाथों मिले पदक को अपनी मां को समर्पित किया। अंक : 487/500, स्थान : प्रदेश में तृतीय, नाम : मन्नत, कक्षा : 12वीं, विज्ञान।