फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल किए गए संदेशों के जरिये ये प्रचार किया जा रहा है कि भारतीय सेना सिख सैनिकों को घर जाने के लिए छुट्टी नहीं दे रही है। उनके छुट्टी के आवेदनों को नामंजूर किया जा रहा है। इसी तरह यह प्रचार करने की कोशिश की गई कि वायुसेना के सिख पॉयलट अपनी ड्यूटी करने से इनकार कर रहे हैं, क्योंकि वरिष्ठ हिंदू अफसर उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।
इसी तरह का एक दुष्प्रचार पाकिस्तान ने पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन के सुरक्षा बलों के संदर्भ में किया, जिसमें यह झूठा प्रचार किया गया कि राष्ट्रपति भवन में तैनात सिक्योरिटी में से सिख जवानों को हटाया जा रहा है, मगर जांच में यह भी फर्जी पाया गया। इस तरह के वायरल संदेशों के बाद सेना और वायुसेना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर शत्रु एजेंटों द्वारा भारतीय सेना व वायुसेना के जवानों के बारे में फर्जी संदेश फैलाए जा रहे हैं। झूठी अफवाहों के जरिये नफरत फैलाई जा रही है। इसलिए ऐसे संदेशों से सजग रहने की जरूरत है।
इस संदर्भ में रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल सी. प्रकाश (सेवानिवृत्त) बताते हैं कि इस तरह का प्रोपेगेंडा साइकोलॉजिकल वारफेयर का हिस्सा है, जो कि पाकिस्तान इन दिनों जमकर कर रहा है। सोशल मीडिया के जरिये ऐसा करना और भी आसान है। इसलिए भारतीय सेना व वायुसेना को इससे न केवल सतर्क रहने बल्कि इसका विभिन्न प्लेटफार्म पर काउंटर करने की भी जरूरत है।
कमांडिंग अफसरों को अपनी-अपनी यूनिटों में तैनात जवानों को इस तरह के दुष्प्रचार के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें सतर्क रहने के लिए कहना होगा। दुश्मन देश इस तरह के साइकोलॉजिकल वारफेयर का इस्तेमाल दूसरे देश में अशांति और नफरत का माहौल पैदा करने के लिए करते हैं। इसलिए सेना के जवानों के साथ-साथ आम लोगों को भी पाक की ऐसी हरकतों से सावधान रहना होगा।