माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। रोडवेज और कॉलेजों की अव्यवस्था के कारण ग्रामीण क्षेत्र या दूसरे जिलों से करनाल के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों का सफर मुश्किल हो रहा है। विद्यार्थियों को न तो समय पर नेशनल हाईवे-44 के चौक चौराहों पर बसें मिलती हैं, न ही पूरी फीस देने के बाद पास जारी हुए हैं। ऐसे में इन विद्यार्थियों को रोजाना वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिससे उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है। बस पास के लिए एक साल की पूरी फीस का भुगतान करने के बावजूद छह माह निकल गए, लेकिन विद्यार्थियों को बस पास नहीं मिले हैं।
करीब चार माह देरी से शुरू हुए कॉलेजों के शैक्षणिक सत्र के कारण दूर से आने वाले विद्यार्थियों की जेब पर ज्यादा असर पड़ रहा है, क्योंकि कॉलेजों में दाखिला फीस के साथ ही बस पास के लिए भी पैसे जमा कराए गए थे। रोडवेज के नियमों के अनुसार बस पास पूरे साल के लिए बनाया जाता है, इसलिए बस पास की पूरे साल की फीस ली गई। अक्तूबर में कक्षाएं शुरू हो गई थी। दो माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक ज्यादातर विद्यार्थियों के पास जारी नहीं हुए। जबकि शैक्षणिक सत्र जून 2022 तक है, ऐसे में यदि जनवरी में इन्हें पास मिलेंगे तो इनकी वैधता भी छह माह की शेष बचेगी। यानी पैसे पूरे साल के देने के बाद भी उन्हें आधे समय के लिए पास जारी होगा।
नहीं रुकती आईटीआई और सेक्टर-14 चौक पर बसें
वर्तमान में सभी डिपो की सभी बसें मार्गों पर चलती हैं। नेशनल हाईवे-44 पर आईटीआई चौक और सेक्टर-14 स्थित राजकीय पीजी कॉलेज के चौक पर बसें नहीं रुकतीं। इस चौक से पहले के कट से ही ज्यादातर बसें एलिवेटिड हाईवे पर चढ़ जाती हैं। वहीं जो बस सर्विस लेन से चौक पर आती है, उस पर सभी विद्यार्थी एक साथ चढ़ने का प्रयास करते हैं। कई बार हादसे भी हो चुके हैं।
5900 को मिले पास, अन्य कर रहे टिकट लेकर सफर
शहर के सभी छह कॉलेजों में सभी सत्रों और कोर्स को मिलाकर करीब 15 हजार से ज्यादा विद्यार्थी ऐसे हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र या दूर से आते हैं। लेकिन रोडवेज के आंकड़ों के अनुसार अब तक 5900 को ही पास जारी हुए हैं। यानी पास के पैसे देने के बाद भी कोई विद्यार्थी निजी या अन्य पब्लिक वाहन से सफर तय करता है तो कोई रोडवेज बस मिलने पर रोजाना टिकट लेकर कॉलेज पहुंचने को मजबूर है।
बस पास की फीस दाखिले के समय में ले ली थी। दो माह से ज्यादा समय हो गया पास नहीं मिला।
- अनंत चौधरी
कॉलेज में कक्षाएं लगाने पानीपत से आते हैं। रोजाना 90 रुपये आने-जाने पर खर्च हो रहे। बस पास नहीं मिला।
- आशीष
नौरता गांव से करनाल आते हैं। 30 रुपये एक तरफ का किराया है। पास के लिए आवेदन किए भी दो माह हो चुके हैं।
- खुशी
असंध से करनाल तक एक तरफ का 55 रुपये किराया लगता है। पास फ्री बनता है। लेकिन कॉलेज इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
- आस्था
बस पास बनने के लिए सूची रोडवेज के पास गई है। एक साथ 250 विद्यार्थियों के पास बनते हैं। यदि एक-दो विद्यार्थियों के दस्तावेज में कमी होने के कारण पास रिजेक्ट होता है तो सूची रिजेक्ट हो जाती है।
- डॉ. राजेश रानी, उच्चतर शिक्षा अधिकारी एवं प्रिंसिपल राजकीय पीजी कॉलेज
छात्राओं का बस पास निशुल्क जारी होता है। लड़कों के पास बनाने के लिए महीने की 10 टिकट के किराये के हिसाब से फीस ली जाती है। बस पास बनाने की प्रक्रिया कॉलेजों से आवेदन आने के बाद ही शुरू होती है। जिनके आवेदन आएंगे, उनके पास बना दिए जाएंगे।
- कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक, रोडवेज करनाल