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अधिकारियों की लापरवाही जनता पर पड़ेगी भारी, 206 कार्य अटके तो 7.67 करोड़ होंगे लैप्स

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गगन तलवार
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करनाल। डी-प्लान में जनता से जुड़े 206 विकास कार्य चल रहे हैं। इन्हें 31 मार्च तक पूरा करना है, अन्यथा इनके लिए स्वीकृत 7.67 करोड़ रुपये की राशि लैप्स हो जाएगी। ऐसे में ये कार्य लटक जाएंगे। जिससे अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा जनता को असुविधाओं के रूप में भुगताना पड़ेगा।
हालांकि जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि कार्य तय समय में पूरे हो जाएंगे। लेकिन महज आठ दिन में काम पूरा करना बड़ी चुनौती है। इधर, लोगों ने भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि जो काम अधिकारी साल भर में नहीं कर पाए, उन्हें महज सप्ताह भर में कैसे पूरा करेंगे। जिले में सबसे ज्यादा बुरी स्थिति पंचायती राज और नगर निगम की है। इन्हें सर्वाधिक बजट और कार्य आवंटित हुए थे। वहीं काम लटकाने में भी यही महकमे सबसे आगे हैं।
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पंचायती राज ने अब तक 8.21 करोड़ रुपये में से 5.58 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन कार्य एक भी पूरा नहीं हुआ। नगर निगम ने 4.98 करोड़ में से 1.44 करोड़ रुपये खर्च करके 74 में से 46 कार्य निपटाए हैं, जबकि 3.53 करोड़ के 28 प्रोजेक्ट का कार्य लटका है। यदि 31 मार्च तक ये पूरे नहीं हुए तो निगम के खाते से 3.53 करोड़ रुपये भी लैप्स हो जाएंगे। ऐसे में जनता को ही परेशानी होगी।
जिले में डी प्लान के तहत वित्त वर्ष 2021-22 में कुल 21 करोड़ 66 लाख 90 हजार रुपये अलॉट हुए थे। इससे 451 विकास कार्य स्वीकृत हुए। इनमें से अभी तक 13.99 करोड़ रुपये खर्च करके 241 कार्य पूरे हुए हैं।
आठ विभागों ने काम पूरा कराया पर बिल पास नहीं कराए
कुल 17 एजेंसियों एवं विभागों की ओर से कार्य किया जा रहा है। इनमें से आठ विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने स्वीकृत सभी कार्य पूरे कर दिए हैं, लेकिन इस कार्य में खर्च हुई राशि के बिल एडीसी कार्यालय में जमा नहीं कराए। यदि समय रहते बिल पास नहीं कराए तो करोड़ों रुपये के इन कार्यों की स्वीकृत राशि लैप्स हो जाएगी और अगले वित्त वर्ष में जारी होने वाली राशि में से काटी जाएगी। ऐसे में नए बजट से आने वाली राशि का जनता को लाभ नहीं हो पाएगा।
डी प्लान के तहत होने वाले कार्य
- 70 प्रतिशत राशि स्कूलों के नवीनीकरण, सामुदायिक केंद्र, चौपाल, जलापूर्ति, आंगनबाड़ी केंद्र, वृद्धाश्रम और शौचालयों के निर्माण सहित जनता की प्राथमिक आवश्यकताओं वाले कार्यों पर खर्च होती है।
- 30 प्रतिशत राशि सड़क, गलियों और नालियों, सीवरेज लाइन के निर्माण में खर्च होती है।
- सभी आठ खंडों और नगर निकायों की आवश्यकता और आबादी के हिसाब से बजट जारी होता है। जिले की कुल आबादी 16 लाख है।
यह है स्थिति
इन विभागों की इतनी राशि बची और काम लटके
विभाग बजट (लाख में) खर्च किया बचा हुआ काम अलॉट लटके
पंचायती राज 821.38 558.72 262.66 120 118 (2 निरस्त)
नगर निगम 498.01 144.95 353.06 74 28
घरौंडा खंड 84.67 65.78 18.85 33 12
कुंजपुरा खंड 66.84 41.61 25.23 20 13
निसिंग खंड 91.96 71.49 20.47 32 14
नीलोखेड़ी खंड 116.27 96.45 19.82 37 17
नगर पालिका इंद्री 25.17 21.05 04.12 08 02
समग्र शिक्षा 25.16 51.27 0.89 14 02
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काम पूरे, लेकिन बिल जमा नहीं कराए
विभाग बजट (लाख में) खर्च किया बचा हुआ काम किए
असंध खंड 29.55 26.26 03.29 09
इंद्री खंड 49.27 29.22 10.05 20
मूनक खंड 62.03 52.29 09.74 22
नगर पालिका असंध 39.25 35.93 03.32 08
नगर पालिका घरौंडा 53.82 48.71 05.11 09
नगर पालिका निसिंग 25.06 24.35 0.71 03
नगर पालिका नीलोखेड़ी 20.35 09.84 10.51 04
नगर पालिका तरावड़ी 37.35 18.19 19.16 05
करनाल खंड का कार्य सबसे अच्छा
करनाल खंड ने सबसे अच्छा काम किया है। कुल 93.76 लाख रुपये का बजट अलॉट हुआ था, 33 कार्य स्वीकृत हुए थे। पूरा पैसा खर्च करके सभी कार्य पूरे हो चुके हैं। अन्य कार्य लटके हैं। जिन विभागों ने काम पूरा कर लिया है, वे अपने बिल जमा करा स्वीकृत राशि ले सकते हैं। - राजेंद्र सिंह, प्लानिंग अफसर
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हर हाल में काम निपटाएंगे अधिकारी
हर हाल में अधिकारियों को 31 मार्च तक कार्य पूरा करके बिल पास कराना है। इस संदर्भ में अधिकारियों को निर्देश भी जारी किए हैं। मैं स्वयं भी कार्यों की समीक्षा कर रहा हूं। किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होने देंगे। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए थे। - योगेश कुमार, एडीसी
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