ग्राउंड रिपोर्ट
धान खरीद को
मंडियां तैयार, एजेंसियों के इंतजाम पूरे नहीं
कल से शुरू होनी है धान खरीद, सबसे बड़ी खरीद एजेंसी डीएफएससी सबसे फिसड्डी, हैफेड की तैयारियां पूरी
राइस मिलर्स असमंजस में लेकिन आढ़तियों ने किया धान खरीद में शामिल होने का फैसला
सभी की निगाहें अब अनाज मंडी मजदूरों की हड़ताल पर टिकी
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। धान खरीद के लिए जिले की अनाज मंडियां तो तैयार हैं लेकिन खरीद एजेंसियों की तैयारी आधी-अधूरी है। मंडी श्रमिकों के हड़ताल के एलान को देखकर नहीं लगता कि धान की खरीद समय पर शुरू हो पाएगी। पहली अक्तूबर से धान खरीद शुरू होनी है लेकिन जिले की कई अनाज मंडियों में अभी तक सफाई भी नहीं हो सकी है। पूसा-1509 धान का उठान भी नहीं हो सका है।
करनाल जिले की सबसे बड़ी खरीद एजेंसी डीएफएससी का जिले में मुखिया ही नियुक्त नहीं किया गया है और न ही निरीक्षकों की ड्यूटियां लगाई जा सकी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि हरियाणा सरकार ने खरीद नीति भी जारी नहीं की है। ऐसे में राइस मिलर्स असमंजस में है लेकिन आढ़तियों के तेवर नरम पड़ गए हैं। उन्होंने धान खरीद में शामिल होने का फैसला किया है। इधर, आज मंडियों में पीआर धान की आवक कम रही। क्योंकि सरकारी खरीद शुरू होने में कम समय शेष रह जाने के कारण किसानों ने पीआर धान की कटाई को सुस्त कर दिया है। फिलहाल तो सभी की निगाहें मजदूरों की हड़ताल पर टिक गई है। यदि मजदूर मंडियों में काम नहीं करेंगे तो खरीद होना मुश्किल जरूर हो जाएगा।
जिले की अनाज मंडियां
करनाल सहित जिले की दस अनाज मंडियों व चार खरीद केंद्रों सहित कुल 14 खरीद केंद्रों पर धान की खरीद की जाएगी। कई अनाज मंडियां पूसा-1509 धान से भरी पड़ी हैं। जिनका उठान चल रहा है। धान खरीद को देखते हुए जिले की सबसे बड़ी मंडी करनाल की स्थिति यह है कि अपराह्न तीन बजे तक मंडी परिसर में जहां तहां कूड़े के ढेर लगे थे। हालांकि ठेकेदार के कर्मचारी उसे एकत्र करके सुखा रहे थे, ताकि उसे साफ किया जा सके। अनाज मंडी सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि गेटपास के लिए ड्यूटियां लगा दी गई हैं। सभी गेटों पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं। कल सुबह तक पूरी मंडी सफाई पूरी हो जाएगी। मंडी प्रशासन एक अक्तूबर से धान की खरीद के लिए पूरी तरह तैयार है।
डीएफएससी की नियुक्त नहीं, अभी कोई तैयारी नहीं
जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग जिले की सबसे बड़ी धान खरीद एजेंसी है। लेकिन पिछले एक महीने से जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक (डीएफएससी) की नियुक्ति नहीं हो सकी है। 30 सितंबर को यहां नए डीएफएससी के पहुंचने की उम्मीद है। क्योंकि उनके हस्ताक्षर से ही धान की खरीद के लिए मंडियों में निरीक्षकों की ड्यूटियां लगाई जानी है। एसओ राजेश वालिया ने बताया कि डीएफएससी की नियुक्ति होते ही सभी कार्य शुरू हो जाएंगे। खरीद पॉलिसी के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।
धान खरीद की तैयारियां पूरी
-धान की खरीद की तैयारियां पूरी कर ली गई है। खरीद के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटियां लगा दी गई है। वारदाना पर्याप्त उपलब्ध हैं। एक अक्तूबर से मंडियों में खरीद शुरू की जाएगी। -अनुराग गुप्ता, जिला प्रबंधक हैफेड करनाल।
मांगे नहीं मानी तो हड़ताल पर जाएंगे श्रमिक
-हरियाणा प्रदेशभर की अनाज मंडियों के श्रमिकों ने एक अक्तूबर से ही हड़ताल पर जाने का एलान किया है। करनाल अनाज मंडी मजदूर यूनियन के राम कुमार महतों ने बताया कि प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर 30 सितंबर को ज्ञापन दिए जाएंगे। सरकार ने 4.20 रुपये मजदूरी पिछले साल से कम कर दी है। लघु सचिवालय पहुंचकर सुबह 10 बजे ज्ञापन दिया जाएगा। मांगे नहीं मानी जाती है तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।
बैनर लगाएंगे पर धान खरीद में शामिल होंगे
सभी अनाज मंडियों के गेट पर आढ़ती अपनी मांगों से संबंधित बैनर लगाएंगे लेकिन धान खरीद में शामिल होंगे। जो मांगे हैं, उन्हें नहीं छोंड़ेगे, लेकिन किसान के हितों को देखते हुए एक अक्तूबर से धान खरीद करेंगे। -रजनीश चौधरी चेयरमैन हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन हरियाणा।
खरीद नीति को देखकर ही निर्णय करेंगे
-मुख्यमंत्री ने अधिकांश मांगे मान ली हैं, लेकिन अभी तक खरीद नीति को जारी नहीं किया है। हालांकि पिछले साल की खरीद नीति को लागू करने की बात कही है लेकिन सिर्फ मौखिक ही तो है। खरीद नीति तो सामने आनी चाहिए, उसे देखकर ही धान खरीद में शामिल होने पर निर्णय लिया जाएगा। -विनोद कुमार गोयल, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन।
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-हरियाणा सरकार सीमांत किसानों को भी एक अक्तूबर से ही हरियाणा की अनाज मंडियों में पीआर धान लाने की इजाजत दे। आज तो पूसा-1509 धान बेचने आया हूं। बिट्टू, किसान, शामली (फोटो-4)
-सरकार ने कह तो दिया कि किसान स्वयं ही अपना शेड्यूल तय कर सकेंगे लेकिन अधिकांश किसानों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। फोन भी है कि गांवों में इंटरनेट नेटवर्क की बड़ी परेशानी है। -लखविंद्र, किसान, हरसाना (फोटो-6)
-मोबाइल फोन में पोर्टल खोलकर उसमें शेड्यूल भरना किसानों के लिए आसान बात नहीं है। यही स्थिति रही तो आधे किसान तो धान ला ही नहीं पाएंगे। या फिर किसी दूसरे का सहारा लेना होगा। -प्रेम, किसान, घोघी माजरा (शामली) फोटो-7
-किसानों को धान लेकर सीधे मंडी में आने दिया जाए, जो भी शेड्यूल तय करना है, उसे मंडी में ही आवक के अनुसार तय किया जाना चाहिए। क्योंकि कभी ट्राली नहीं मिलती को कभी कंबाइन नहीं मिलती। कभी मौसम खराब हो जाता है। -रंजीत सिंह कर्ण विहार करनाल (फोटो-5)