फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सफलता के टिप्स: झारखंड में जज बने करनाल निवासी मोहित चौधरी बोले- किस्मत के भरोसे नहीं मिलता मुकाम, मेहनत से भरें ऊंची उड़ान

Thu, 16 Dec 2021 12:44 PM IST
भूपेंद्र सिंह गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)

सार

10 साल वकालत के साथ-साथ पढ़ाई करके करनाल के मोहित चौधरी झारखंड में जज बने हैं। सफल युवा होने के नाते अमर उजाला संवाद के तहत युवाओं काे  उन्होंने टिप्स दिए और संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि बिना कोचिंग खुद पढ़ाई करके भी सपने पूरे कर सकते हैं, केवल ईमानदारी और लगन जरूरी है।
विज्ञापन
मोहित चौधरी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केवल किस्मत के सहारे बैठे रहने से सफलता नहीं मिलती। मुकाम तक पहुंचने के लिए मेहनत जरूरी है। यह बात हरियाणा के करनाल निवासी एवं वर्तमान में झारखंड के सिविल जज, जूनियर डिविजन (प्रोबेशनरी) मोहित चौधरी ने कही। जिन्होंने 10 साल वकालत करने के साथ-साथ पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की। उन्होंने बिना कोचिंग के खुद पढ़ाई करके फरवरी 2020 में जारी हुए झारखंड न्यायिक सेवा के परीक्षा परिणाम में 19वां रैंक पाया था।

विज्ञापन


कर्ण नगरी के सफल युवा होने के नाते अमर उजाला संवाद के तहत विशेष बातचीत में उन्होंने युवाओं को जीवन में सफलता पाने के टिप्स दिए। साथ ही अपने संघर्ष की कहानी भी साझा की। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि मुकाम तक पहुंचने के लिए केवल ईमानदारी और लगन के साथ मेहनत करना जरूरी है। हमें दूसरे को देखकर आगे नहीं बढ़ना होगा, बल्कि अपना लक्ष्य खुद निर्धारित करना है।

 

लक्ष्य प्राप्ति के लिए परिवार का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने नए वकीलों से आह्वान किया कि अगर कोई प्रैक्टिस में आ रहा है तो उसे केवल प्लान ए ही रखना है, प्लान बी लेकर न आएं, क्योंकि दो नाव में सवार होने वाला पार नहीं होता। वकालत में आ रहे युवा केवल कमाने की ही सोचते हैं, तो ये खुद से बेईमानी है, क्योंकि यहां दूसरों की जिंदगी के लिए कार्य करना होता है और न्याय दिलाने के लिए उसके साथ चलना पड़ता है। 

गुरु का कार्य केवल रास्ता दिखाना है, चलना खुद पड़ेगा

न्यायाधीश मोहित चौधरी का कहना है कि गुरु का कार्य केवल रास्ता दिखाना है, आगे खुद ही चलना पड़ेगा। उन्होंने भी अपनी गलतियों से ही सीखा और आगे बढ़े। जरूरी नहीं है कि संपन्न लोग ही महंगी कोचिंग लेकर सफल हो सकते हैं।

 

मेहनत के बल पर वकालत करके वे भी यहां तक पहुंचे हैं। वे अपने कॉलेज के प्रोफेसर नरेश वत्स जोकि वर्तमान में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार हैं और चंडीगढ़ हाईकोर्ट के एडवोकेट गुरेंद्र पाल को अपना आदर्श मानते हैं, क्योंकि एक ने उन्हें अकादमिक तौर पर तैयार किया और बताया कि लक्ष्य पाने के लिए कैसे पढ़ाई करनी चाहिए और दूसरे ने अदालत में वकालत की बारीकियां सिखाईं। 

माता-पिता समेत परिवार में 22 सदस्य वकील

करनाल के सेक्टर-13 निवासी न्यायाधीश के परिवार के कई सदस्य वकील हैं। पिता कैलाश बजाज चौधरी और मां मंजूलता बजाज के अलावा चाचा, तीन मौसा, मामा और मामी को मिलाकर 22 सदस्य वकील हैं। सभी का काम उन्हें वकालत में जाने के लिए प्रेरित करता था। लेकिन उनसे एक कदम आगे निकलकर जज बनना उनका सपना था। पहले उनका परिवार इंद्री के जोहड़ माजरा गांव में रहता था। दादा स्वर्गीय बिशम लाल नंबरदार थे। 

हरियाणा, पंजाब में मेन्स और राजस्थान न्यायिक सेवा में साक्षात्कार भी दिया

न्यायाधीश ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से 2010 में एलएलबी और 2012 में एलएलएम की पढ़ाई पूरी की। एलएलबी के बाद से वकालत शुरू कर दी। दिसंबर 2019 में लॉ में नेट भी पास किया। वकालत के साथ-साथ ही न्यायिक सेवा की परीक्षाएं देनी शुरू की। हरियाणा, पंजाब न्यायिक परीक्षा में तो मेन्स तक ही पहुंच पाए, जबकि 2015 में राजस्थान न्यायिक परीक्षा में उन्होंने साक्षात्कार भी दिया था। जबकि झारखंड न्यायिक सेवा में पहले प्रयास में सफलता मिली। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित मूट कोर्ट कंपीटिशन में बेस्ट स्पीकर का खिताब भी प्राप्त कर चुके हैं। 2020 में ही सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकार्ड परीक्षा भी उत्तीर्ण की।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें