माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बरसात के सीजन को सृजन मास माना है, इसमें जीवों की उत्पत्ति सर्वाधिक होती है, नई-नई वनस्पतियां पनपती हैं। उनके कदमों के नीचे आकर कहीं किसी जीव का जीवन समाप्त न हो जाए, शायद इसी धारणा को लेकर आठ महीने पैदल यात्रा करने वाले जैन मुनि चातुर्मास एक ही स्थान पर व्यतीत करते हुए विशेष साधना करते हैं।
वह जल को भी एक जीव ही मानते हैं, इसलिए बरसात में उनके कदम ठहर जाते हैं। पूर्णिमा के बाद सावन के पहले दिन से चातुर्मास शुरू हो जाता है, जो देवउठान एकादशी तक चलेंगे। पैदल यात्राएं करके जैन मुनि अपने ठिकानों पर पहुंच रहे हैं। जीटी बेल्ट के करनाल, यमुनानगर, कैथल, पानीपत और अंबाला आदि में जैन मुनियों ने नगर प्रवेश कर लिया है। यहां वे चार महीने ठहर कर लोगों को बसुधैव कुटुंबकम, परोपकार, अहिंसा का संदेश देंगे।
सनातन धर्म में भी चातुर्मास को लेकर कई मत प्रचलित हैं। देवशयनी एकादशी से श्रीहरि विष्णु योग शयन मुद्रा में चले जाते हैं। सावन के प्रथम दिवस से चातुर्मास शुरू हो जाते हैं। अधिकांश स्थानों पर पूर्णिमा से ही शुरू कर दिया जाता है। समय के साथ धर्म की रीतिरिवाजों में भी परिवर्तन आया है। सनातन धर्म के साधु संतों में चातुर्मास मनाने का प्रचलन बेहद कम हो गया है, लेकिन जैन मुनि अभी भी इस परंपरा को कायम रखे हुए हैं। आधुनिकता की ओर भागती जिंदगी के बीच भी जैन मुनि लग्जरी कारों का मोह छोड़ अपनी यात्रा पैदल ही पूरी करते हैं। रुपये-पैसे को भी हाथ नहीं लगाते हैं। स्वाद से भी कोई नाता नहीं रखते हैं, जो रास्ते में दे देता है, उसे ही ग्रहण कर लेते हैं। पूरे चातुर्मास के दौरान एक स्थान पर ठहरकर विशेष साधना करते हैं।
कहां कौन जैन मुनि पहुंचे
चातुर्मास प्रवास के लिए करनाल शहर में रमेश मुनि महाराज अपने थाणे के मुनियों के साथ पहुंचे हैं। घरौंडा में सुधीर मुनि व पुनीत मुनि महाराज पहुंचे हैं। पानीपत जिले में संघ संचालक नरेश मुनि महाराज, राजऋषि राजेंद्र मुनि महाराज व चार अन्य मुनि, यमुनानगर में आनंद मुनि महाराज व दीपेश मुनि महाराज, कुरुक्षेत्र में महासाध्वी मंजू शाह व सुमन महाराज, अंबाला में महासाध्वी सुप्रतिभा महाराज व अन्य चार महासाध्वी, कैथल जिले में कमलश्री महाराज की शिष्या महासाध्वी सुनंदा महाराज पहुंचे हैं। ये सभी पैदल यात्रा करते हुए अपने अपने चयनित शहरों में चातुर्मास के लिए पहुंच चुके हैं।
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श्री आत्ममनोहर आराधना जैन मंदिर के उप प्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज पैदल चलकर लुधियाना के रामकोट पहुंचे हैं, वह इस बार वहीं चातुर्मास व्यतीत करेंगे। पीयूष मुनि महाराज ने बताया कि जल में असंख्य जीव होते हैं, इसलिए जल भी एक जीव है। बरसात के मौसम में प्रकृति पनपती है, जीवों की उत्पत्ति होती है। पैदल चलने से इन जीवों का जीवन संकट में हो सकता है, इसलिए इस मौसम में पैदल चलना बंद करके एक ही स्थान पर रहकर साधन भजन करते हैं। मानवता के कल्याण के लिए उपदेश देते हैं। शेष आठ माह विचरण करते रहते हैं। इसलिए जहां चातुर्मास करना है, जैन धर्म के मुनि चातुर्मास के लिए पहुंच रहे हैं।