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Haryana: निर्दलियों के सिर सजता रहा ताज, सरकार बनाने में मददगार; हुड्डा व मनोहर सरकार ने मंत्री पद तक नवाजा

Sun, 01 Sep 2024 01:35 PM IST
नवीन दलाल गगन तलवार, करनाल (हरियाणा)

सार

हरियाणा में सरकार को बनाने व सरकार को गिरने से बचाने आजाद विधायकों का सहयोग रहा है। आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। हरियाणा में 90 में से 70 सीटें ऐसी हैं, जहां कभी न कभी आजाद प्रत्याशी जरूर जीता है।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा के गठन के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनावों में अब तके 116 आजाद उम्मीदवार जीत चुके हैं। 1967 में हुए पहले विस चुनाव व 1982 में सबसे ज्यादा 16-16 आजाद उम्मीदवार जीते। इन आजाद विधायकों को कई मौकों पर सरकार को बनाने व सरकार को गिरने से बचाने में सहयोग रहा है। 2009 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और 2019 में मनोहर लाल की गठबंधन सरकार ने तो इनको मंत्री पद तक दिए। 2009 में सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गोपाल कांडा को गृह राज्यमंत्री और ओमप्रकाश जैन, सुखबीर कटारिया व पंडित शिवचरण को कैबिनेट मंत्री बनाया। इसी तरह 2019 में मनोहर व 2024 में सैनी सरकार ने रणजीत सिंह को बिजली मंत्री बनाया। इसी तरह नीलोखेड़ी के विधायक धर्मपाल गोंदर भी वन विकास बोर्ड के चेयरमैन रहे।

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केवल एक आजाद महिला उम्मीदवार जीत पाईं
आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं, लेकिन केवल एक बार 1982 में बल्लभगढ़ से शारदा रानी ही जीत पाईं। आजाद उम्मीदवारों में सबसे बड़ा नाम पूर्व मंत्री अनिल विज का भी है, जो पहली बार आजाद जीते लेकिन बाद में उनके किसी दल से टिकट मिला और उन्होंने कई बार जीत दर्ज की।

70 सीटों पर आजाद जीते, सर्वाधिक सात बार पूंडरी से
हरियाणा में 90 में से 70 सीटें ऐसी हैं, जहां कभी न कभी आजाद प्रत्याशी जरूर जीता है। सर्वाधिक सात बार पूंडरी विधानसभा क्षेत्र से आजाद प्रत्याशी जीतकर सदन में पहुंचे हैं। नीलोखेड़ी हलके से पांच, नूंह और हथीन से चार-चार, झज्जर, सोहना, सफीदों, नारनौल से तीन-तीन बार आजाद प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। 18 सीटों पर दो-दो बार और 44 सीटों पर एक बार आजाद प्रत्याशी जरूर जीता है।

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8,428 की जमानत भी जब्त

अब तक हुए चुनावों में कुल 8835 प्रत्याशी आजाद उतर चुके हैं लेकिन चौधर की चाह में चुनावी मैदान में 8428 प्रत्याशी ताे अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। सबसे ज्यादा 1996 में 2022 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था और सबसे कम 1968 में महज 168 ने ही आजाद चुनाव लड़ा।

पिछले चुनाव में इनको सात को मिली जीत

पुंडरी से रणधीर सिंह गोलन, नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर, रानिया से रणजीत सिंह, दादरी से सोमबीर, महम से बलराज कुंडू, बादशाहपुर से राकेश दोलताबाद, पृथला से नयनपाल रावत।
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इस वर्ष इतने आजादी प्रत्याशी रहे मैदान में

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