करनाल। हरियाणा सरकार किसानों को बिजली की बजाय सोलरऊर्चा से खेतों की सिंचाई की ओर आकर्षित कर रही है। इसके लिए नाबार्ड की ओर से इस साल प्रदेशभर में 845 करोड़ रुपये की लागत से 22 हजार सोलर पंप लगाए जाने की योजना है। सोलरपंप से सिंचाई की व्यवस्था देखने के लिए शुक्रवार को नाबार्ड के चेयरमैन डा. जीआर चिंताला खेतों पर पहुंचे।
चेयरमैन डा.जीआर चिंताला ने इस दौरान किसानों से बातचीत की और सोलरपंप से सिंचाई के अनुभव जाने। बताया कि सोलरपंप पर सरकार की ओर से 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने अपने साथ आए अधिकारियों से इस बारे में विचार-विमर्श भी किया। उन्होंने बताया कि सोलर पंप लगाने से किसानों को लाभ मिलेगा। बिजली की खपत कम होगी इसलिए अधिक से अधिक किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक सोलर का प्रयोग करें।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के महानिदेशक हनीफ कुरैशी ने चेयरमैन नाबार्ड को आश्वस्त किया कि प्रदेश में नाबार्ड के लक्ष्य को हरहाल में पूरा किया जाएगा। प्रदेश में सोलर पंप की पीएम कुसुम योजना के तहत 15 हजार सोलर पंप 520 करोड़ रुपये की लागत से पहले स्थापित किए जा चुके हैं और 22 हजार सोलर पंप अगले वर्ष में स्थापित किए जाएंगे। इन पर 845 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस मौके पर जिला परिषद सीईओ गौरव कुमार, हरेडा से पीके नोटियाल, अजीत भादू, नायब तहसीलदार राहुल, परियोजना अधिकारी श्रीओम गोयल भी मौजूद रहे।