करनाल। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजटीय पिटारे में जहां उद्योगों के लिए दीर्घकालिक रोडमैप नजर आया, वहीं शहरों के विकास और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की झलक भी दिखाई दी। आधुनिक शहरों को विकसित करने, शहरी नियोजन और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक मदद भी देगी।
बजट में इस घोषणा के बाद करनाल शहर में विकास की कई नई परियोजनाओं की आस बंधी है, क्योंकि करनाल न केवल सीएम सिटी है, बल्कि औद्योगिक और पर्यटन की दृष्टि से सूबे के महत्वपूर्ण जिलों में से एक है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आने बाद करनाल में शहरी विकास से जुड़ी 35 से अधिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मगर बजट में केंद्र सरकार ने शहरी विकास व उन्हें आधुनिक बनाते हुए उनकी क्षमता बढ़ाने के संदर्भ में जो प्रतिबद्धता दिखाई है, उससे निसंदेह करनाल जिले को बड़ा लाभ मिलने वाला है।
करनाल में करनाल सिटी के साथ-साथ घरौंडा, नीलोखेड़ी, निसिंग, असंध, इंद्री व तरावड़ी में शहरी विकास के लिए स्थानीय निकाय मौजूद हैं। यानी ये सभी प्रखंड शहरों का रूप लेते जा रहे हैं। साथ ही असंध को पहले से ही जिला बनाने की मांग बुलंद है। ऐसे में इस घोषणा से संबंधी क्षेत्रों के शहरीकरण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, करनाल में कृषि यंत्र निर्माण व फार्मा संबंधी कई बड़ी इकाइयां मौजूद है। जिनका सलाना टर्नओवर अरबों रुपये में है। बजट में उद्योगों को लेकर जो घोषणाएं हुईं हैं, उससे निसंदेह जिले के उद्योगों को भी आने वाले समय में लाभ मिलेगा। लेकिन इन उद्योगों को फिलहाल कोई सीधा लाभ नहीं मिला है। उद्यमियों को उम्मीद थी कि सरकार कृषि उपकरणों और फार्मा इंडस्ट्री के लिए कुछ खास घोषणा करेगी।
आम बजट ऐतिहासिक है, करदाता पर भरोसा किया है। क्रिप्टो करेंसी को मान्यता देकर 30 प्रतिशत टैक्स लगाना और जूता चप्पल व खेती का सामान सस्ता करना बेहतर कदम है। विदेशों से मशीनें मंगाने पर टैक्स में राहत दी है, गतिशक्ति से देश बदलेगा।
अमित गुप्ता, उपाध्यक्ष, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स
यह सही है कि इंडस्ट्री के दर्द का तत्कालिक उपचार नहीं मिला है लेकिन ढाचांगत विकास, नौकरियां देने, प्राकृतिक खेती, कृषि, कौशल व चिकित्सीय सुविधाओं को बढ़ावा जैसे कई कदम उद्योग जगत को दीर्घकालिक बड़ा लाभ देंगे। रॉ मैटेरियल, ट्रांसपोर्ट आदि पर ध्यान देकर यदि महंगाई नियंत्रण पर भी ध्यान दिया जाता तो और बेहतर होता।
- भावुक मेहता, महासचिव, करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
औद्योगिक जगत निराश नहीं है, स्टार्ट अप को 2023 तक करके नई फैक्टरियों को रास्ता दिया गया है। एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए, ड्रोन से खाद व दवाई का स्प्रे आदि काफी बेहतर उपाय है। यदि सरकार पीएनजी को जीएसटी के दायरे में लाती, आयकर स्लैब को बढ़ाया जाता तो और अधिक बेहतर हो सकता था।
- रविंद्र ढल, प्रधान, करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
यह राहत की बात है कि इंडस्ट्री पर कोई नया टैक्स नहीं लाया गया है, हालांकि कोरोना काल में सरकार के बढे़ खर्चों को देखते हुए लग रहा था कि टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। कारपोरेट सरचार्ज को 12 प्रतिशत से कम करके सात प्रतिशत तक करने से भी इंडस्ट्री को काफी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर बजट संतोषजनक है।
- मनोज अरोड़ा, प्रधान हरियाणा स्टेट इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कारपोरेशन
एमएसएमई को बढ़ावा देकर उद्योग जगत को राहत दी गई है। एमएसएमई से रेलवे के भी आइटम खरीदें जाएंगे। कारपोरेट टैक्स को कम करके भी बड़ी राहत दी गई है। अधिक उद्योग लगेंगे तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जीडीपी में भी सुधार आएगा। क्रिप्टो करेंसी पर ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। टैक्स में भी सहूलियतें मिली हैं।
- आरएल शर्मा, राज्य प्रधान हरियाणा फार्मास्युटिकल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन