संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि इनाम जीतना ही जरूरी नहीं है, बल्कि किसी प्रतियोगिता में भाग लेना ही बड़ी उपलब्धि होती है। उनके विचार से प्रत्येक प्रतिभागी विजेता होता है। उन्होंने किसानों को एनडीआरआई में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अध्ययन ने संकेत दिया है कि एक किसान को डेयरी व्यवसाय का लाभ पाने के लिए कम से कम 80 पशुओं को रखना चाहिए।
इस डेयरी मेले का मुख्य उद्देश्य एनडीआरआई और अन्य आईसीएआर संस्थानों और अन्य निजी उद्यमी की प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना था। इस मौके पर संयुक्त निदेशक डा. एके त्यागी, आयोजन सचिव डा. केएस कादियान, डा. बीएस मीणा, डा. सुजीत झा व अन्य वैज्ञानिक मौजूद रहे।
राष्ट्रीय डेयरी मेले में गुरमीत की बछड़ी और सुमन की भैंस नंबर वन
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेले के दूसरे दिन अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें क्रॉसब्रीड की बछड़ियों की सौंदर्य प्रतियोगिता में खेरी नारू, करनाल के किसान गुरमीत सिंह की बछड़ी प्रथम स्थान पर रही। वहीं, दिलावरा, करनाल के किसान सतीश रावल की बछड़ी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया और कुचपुरा करनाल के किसान रमेश चंद की बछड़ी तीसरे स्थान पर रही।
इसी प्रकार, दो दांत से ऊपर की कटड़ी की सौंदर्य प्रतियोगिता में अनिल लजवाना, कुर्द जींद प्रथम, शेरगढ़, करनाल के किसान ईश्वर सिंह की द्वितीय और कोहंड, करनाल के कुलदीप की कटड़ी तृतीय स्थान पर रही। इसी प्रकार, भैंस की सौंदर्य प्रतियोगिता में भिवानी जिले की सुमन की भैंस ने पहला, नरेंदर सिंह, डीडवारी, पानीपत जिले के किसान की भैंस दूसरे और यमुनानगर जिले के किसान राज कुमार की भैंस ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
किसान विचार संगोष्ठी में किसान के साथ रूबरू हुए वैज्ञानिक
डॉ. एमएस चौहान, की अध्यक्षता में किसान विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए। डा. चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन किसानों का महत्वपूर्ण व्यवसाय है, लेकिन इस व्यवसाय में पशुपालकों को मुंह पका, गलघोंटू, थनैला, समय पर पशु का हीट में न आना और समय से पहले गर्भ का गिर जाना जैसे अनेक प्रकार की समस्याओं का समाना करना पड़ता हैं। इनसे निदान पाने के लिए समय पर टीकाकरण करवाना जरूरी है।