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राष्ट्रीय डेयरी मेलाः दुग्ध उत्पादन में प्रदीप की गाय प्रथम, गुरमीत की बछड़ी, सुमन की भैंस नंबर वन

Mon, 17 Feb 2020 02:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेले में उन्नत नस्ल के पशुओं का जलवा रहा। मेले में सौंदर्य, दुग्ध उत्पादन, दुग्ध दोहन सहित 10 श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। उच्च दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता के एचएफ संकर नस्ल की श्रेणी में दादूपुर (करनाल) के किसान प्रदीप की गाय ने 58.86 किलो दूध देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। 

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बरानी खालसा के किसान विजेंद्र चौहान की गाय 58.17 किलो दूध और दादूपुर के किसान प्रदीप की गाय 57.65 किलो दूध देकर क्रमश: द्वितीय और तृतीय स्थान पर रही। अन्य क्रॉस ब्रीड गाय की दुग्ध प्रतियोगिता में अंबाला के किसान जसदीप सिंह की गाय ने 26.97 किलो दूध देकर पहला स्थान हासिल किया। 

देसी गाय की दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता में तरावड़ी के किसान राम सिंह की गाय ने 21.31 किलो दूध देकर प्रथम स्थान, किसान नरेश की गाय 15.81 किलो दूध देकर द्वितीय और करनाल के रामपाल की गाय ने 15.75  किलो दूध देकर तृतीय स्थान प्राप्त किया। मुर्राह भैंस (दुग्ध उत्पादन) प्रतियोगिता में असंध के किसान रणदीप की भैंस ने (21.77 किलो दूध) पहला स्थान झटका और मूंड गांव के किसान कुलदीप और कैथल के किसान राकेश की भैंसों ने क्रमश: (18.94) और (17.84) किलो दूध देकर द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया है। सोमवार को मेले के अंतिम दिन आईसीएआर के उप महानिदेशक कृषि विस्तार डा. एके सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि विजेता पशुपालकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। 
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डा. एके सिंह ने कहा कि एनडीआरआई ने देश में डेयरी विकास में योगदान दिया है। डेयरी में किसान की आय बढ़ाने की क्षमता है, विशेष रूप से वे जो सीमांत या भूमिहीन हैं। उन्होंने किसानों को खेती के एकीकृत मॉडल को अपनाने की सलाह दी और कहा कि एनडीआरआई को इस संबंध में किसानों की मदद करनी चाहिए।

संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि इनाम जीतना ही जरूरी नहीं है, बल्कि किसी प्रतियोगिता में भाग लेना ही बड़ी उपलब्धि होती है। उनके विचार से प्रत्येक प्रतिभागी विजेता होता है। उन्होंने किसानों को एनडीआरआई में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अध्ययन ने संकेत दिया है कि एक किसान को डेयरी व्यवसाय का लाभ पाने के लिए कम से कम 80 पशुओं को रखना चाहिए।

इस डेयरी मेले का मुख्य उद्देश्य एनडीआरआई और अन्य आईसीएआर संस्थानों और अन्य निजी उद्यमी की प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना था। इस मौके पर संयुक्त निदेशक डा. एके त्यागी, आयोजन सचिव डा. केएस कादियान, डा. बीएस मीणा, डा. सुजीत झा व अन्य वैज्ञानिक मौजूद रहे।

राष्ट्रीय डेयरी मेले में गुरमीत की बछड़ी और सुमन की भैंस नंबर वन

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेले के दूसरे दिन अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें क्रॉसब्रीड की बछड़ियों की सौंदर्य प्रतियोगिता में खेरी नारू, करनाल के किसान गुरमीत सिंह की बछड़ी प्रथम स्थान पर रही। वहीं, दिलावरा, करनाल के किसान सतीश रावल की बछड़ी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया और कुचपुरा करनाल के किसान रमेश चंद की बछड़ी तीसरे स्थान पर रही।
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इसी प्रकार, दो दांत से ऊपर की कटड़ी की सौंदर्य प्रतियोगिता में अनिल लजवाना, कुर्द जींद प्रथम, शेरगढ़, करनाल के किसान ईश्वर सिंह की द्वितीय और कोहंड, करनाल के कुलदीप की कटड़ी तृतीय स्थान पर रही। इसी प्रकार, भैंस की सौंदर्य प्रतियोगिता में भिवानी जिले की सुमन की भैंस ने पहला, नरेंदर सिंह, डीडवारी, पानीपत जिले के किसान की भैंस दूसरे और यमुनानगर जिले के किसान राज कुमार की भैंस ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

किसान विचार संगोष्ठी में किसान के साथ रूबरू हुए वैज्ञानिक
डॉ. एमएस चौहान, की अध्यक्षता में किसान विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए। डा. चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन किसानों का महत्वपूर्ण व्यवसाय है, लेकिन इस व्यवसाय में पशुपालकों को मुंह पका, गलघोंटू, थनैला, समय पर पशु का हीट में न आना और समय से पहले गर्भ का गिर जाना जैसे अनेक प्रकार की समस्याओं का समाना करना पड़ता हैं। इनसे निदान पाने के लिए समय पर टीकाकरण करवाना जरूरी है। 
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