फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टोक्यो ओलंपिक: स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा की जिंदगी के अनसुने किस्से, अमर उजाला से दोस्तों ने किया साझा

Sun, 08 Aug 2021 01:05 AM IST
ajay kumar भानू भारद्वाज, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)

सार

टोक्यो ओलंपिक में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा की जिंदगी के कुछ अनसुने किस्से दोस्तों ने अमर उजाला से साझा किया। दोस्त नीरज की जीत से फूले नहीं समा रहे हैं। सभी ने नीरज के वतन लौटने पर भव्य स्वागत का इंतजाम कर रखा है। आइए पढ़ते हैं नीरज की जिंदगी की अनकही बातें...
विज्ञापन
नीरज चोपड़ा - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नीरज चोपड़ा की स्वर्णिम उपलब्धि के बाद उनके खिलाड़ी दोस्त भी पूरी तरह उत्साहित है। अब ये दोस्त नीरज के साथ हॉस्टल में बिताए पांच सालों के पलों याद कर और ज्यादा गौरवान्वित हो रहे हैं, क्योंकि आज उनका दोस्त नीरज ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बन चुका है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में इन दोस्तों ने नीरज के साथ अपने संस्मरणों को साझा किया।

विज्ञापन

 
करनाल निवासी जेवनिल थ्रो के खिलाड़ी एवं कोच मोहित सैनी बताते हैं कि मई 2011 से 2015 तक वे लोग पंचकूला स्पोर्ट्स हॉस्टल में नीरज के साथ रहते थे। उस कमरे में नीरज के साथ वह खुद और उनके दोस्त नरेंद्र, हरेंद्र सिंह, परविंद्र व बिट्टू देशवाल रहते थे। सभी खिलाड़ी थ्रो इवेंट के थे। 

मोहित सैनी ने बताया कि नीरज यारों का यार, चंचल और बिंदास प्रवृति का शख्स है। लेकिन अपने खेल के प्रति जितनी गंभीरता नीरज में है, उसी की बदौलत आज उन्होंने सोना जीता है। नीरज चोपड़ा पनीर की सब्जी बहुत अच्छे से बनाता था और जब किसी दिन दोस्त मांसाहारी भोजन के लिए कहते तो उन्हें मना करते हुए सदैव शाकाहारी रहने की सलाह देता था। जब कभी दोस्तों में किसी बात को लेकर झगड़ा हो जाता तो नीरज उस दिन शाम को अलग से लजीज व्यंजन तैयार करता और सभी दोस्तों को संग बैठाकर खिलाता, ताकि दोस्तों का मनभेद एक साथ बैठकर खाने के दौरान ही खत्म हो जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

चाचा कहते थे- एक दिन ओलंपिक में राष्ट्रगान बजवाना है

लंबे बाल रखने और बाइक पर स्टंट करने के शौकीन नीरज अक्सर दोस्तों से कहते थे कि जेवलिन में एकदिन तो ओलंपिक में हरियाणा का लठ गाड़ना ही है। बाइक पर दोस्तों को बैठाकर वे कई बार स्टंट करते थे।

दोस्तों के घरेलू आयोजनों में उनके घर जाकर वे एक परिजन के तरह अपना दायित्व भी निभाते हैं और खुशी के अवसरों पर यारों के साथ खूब मस्ती भी करते है। नीरज के सबसे छोटे चाचा सुरेंद्र नीरज को हमेशा प्रोत्साहित करते रहते थे। वे जब भी हॉस्टल मिलने आते थे तो यही कहते थे ‘नीरज एक दिन ओलंपिक में देश का झंडा बुलंद कर राष्ट्रगान बजवाना है।’

...जब दोस्तों ने भूत बनकर डराया
मस्ती का एक किस्सा सुनाते हुए दोस्त सैनी बताते है कि एक बार पंचकूला में हम सभी दोस्त फिल्म देखकर रात को लौटे तो नीरज समेत सभी ने फैसला लिया कि हॉस्टल में मौजूद अन्य खिलाड़ियों को क्यों न भूत बनकर डराया जाए फिर क्या था सभी दोस्त भूत बन गए और उन्होंने विभिन्न तरीकों से डरावनी आवाजें निकालकर हॉस्टल के अन्य खिलाड़ियों को खूब डराया। 

नीरज बादाम घोटकर उससे बादाम रोगन बनाते थे और दोस्तों को भी खूब खिलाते थे। नीरज का मानना था कि बादाम से दिमाग भी तेज होगा और शरीर में ताकत भी आएगी। दोस्तों ने नीरज को करनाल बुलाकर उनके सम्मान में बड़ा आयोजन करने का भी विचार बनाया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें