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31. आंगनबाड़ी वर्कर्स के आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने दिया समर्थन

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फोटो--- 59 से 64 नंबर है।
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने दिया आंगनबाड़ी वर्कर्स के आंदोलन को समर्थन
बोले, सरकार अपनी घोषणाओं को पूरा करे, नहीं तो सरकार में आने पर हम पूरा करेंगे
फव्वारा पार्क में चल रहे महापड़ाव में पहुंचे थे पूर्व सीएम, विधानसभा में भी मुद्दा उठाने का दिया आश्वासन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी आंगनबाड़ी वर्कर्स के आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है। वे शनिवार को फव्वारा पार्क में चल रहे आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन के महापड़ाव में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे उनके मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। सरकार को अपनी घोषणाओं को जल्द पूरा करना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि यदि सरकार आंगनबाड़ी वर्कर्स मांगों को पूरा नहीं करती तो प्रदेश में सरकार बनने के बाद कांग्रेस इसे पूरा करेगी। धरने पर पहुंचने के बाद वर्कर्स ने पूर्व सीएम का स्वागत किया और उन्हें 19 सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा।
महापड़ाव के छठे दिन शनिवार को तालमेल कमेटी की नेता शकुंतला और पुष्पा दलाल ने धरने की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि मांगों के लिए महिलाएं 75 दिनों से सड़कों पर बैठी हैं। वहीं सरकार 52 हजार आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के साथ सरकार धोखा कर रही है। 18 फरवरी को मांगों पर बातचीत करने के लिए बुलाया लेकिन सरकार यूनियन को पत्र देकर बातचीत से मुकर गई। अब 21 फरवरी को चंडीगढ़ में उनकी वार्ता होगी। यदि अब भी समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को लेकर कोई भी कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और असंध से कांग्रेस विधायक शमशेर सिंह गोगी भी आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री के साथ पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा, पूर्व विधायक सुमिता सिंह भी शनिवार को धरने पर पहुंची। धरने पर शनिवार को सर्व कर्मचारी संघ के राज्य कमेटी सदस्य कृष्ण शर्मा, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच के प्रदेश महासचिव मास्टर सूबे, सीटू प्रदेश महासचिव जगपाल राणा, यूटीयूसी के राज्य उपाध्यक्ष ईश्वर राठी मौजूद रहे।
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पिछले चार साल से केंद्र सरकार की ओर से की गई वेतन बढ़ोतरी का पैसा सरकार नहीं दे रही है। ये हमारा अधिकार है।
-पूनम राणा
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सरकार ने 2018 में आउटसोर्स पॅालिसी के तहत वर्कर्स का मानदेय तय किया था। इस संबंध में सरकार को वार्ता में रुख स्पष्ट करना चाहिए। - मीना
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सरकार ठेका कर्मचारियों के आश्रितों को साधारण मृत्यु पर तीन लाख रुपये दे सकती है लेकिन वर्कर हेल्पर को 40 साल सेवा के बाद भी लाभ नहीं मिला है। - राजेश्वरी
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मुख्यमंत्री ने स्वयं 2018 में कुशल-अकुशल मजदूर का दर्जा देकर महंगाई भत्ता लागू करने की बात की थी। अब इस निर्णय से सरकार पीछे क्यों हट रही है। -नीलम राणा
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वार्ता करके समाधान निकाला जाना चाहिए। बार-बार तारीख बदलने से आंदोलन कमजोर नहीं होगा। 21 को सरकार मांगों पर बातचीत करके उनका हल निकाले। -सुनीता
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आंदोलनों को भड़काने का प्रयास करते हैं पूर्व मुख्यमंत्री
करनाल। मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक जगमोहन आनंद ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल के भ्रष्टाचार को प्रदेश की जनता आज तक भूली नहीं है। जनता अब कांग्रेस के बहकावे में आने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने समान विकास कार्य किए हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री करनाल आकर बस आरोप लगाना जानते है। जबकि उनके पास किसी भी आरोप का कोई आधार नहीं है।
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