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Haryana: नौ जिलों में वर्षों से आफत बनती रही बाढ़, सैटेलाइट आधारित अध्ययन में 67852 हेक्टेयर भूमि है प्रभावित

Tue, 18 Jul 2023 11:02 AM IST
नवीन दलाल कुशाग्र मिश्रा, करनाल (हरियाणा)

सार

हरियाणा के नौ जिलों में बाढ़ वर्षों से आफत बनती रही है। जिसके कारण वर्ष 1998 से 2022 तक के अध्ययन में सामने आया है कि हरियाणा की करीब 67852 हेक्टेयर भूमि बाढ़ की चपेट में आती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सैटेलाइट के माध्यम से देश में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का अध्ययन किया है। इसके आधार पर बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का एक एटलस भी तैयार किया गया है, जिसमें पता चला है कि हरियाणा के नौ जिलों में बाढ़ वर्षों से आफत बनती रही है। वर्ष 1998 से 2022 तक के अध्ययन में सामने आया है कि हरियाणा की करीब 67852 हेक्टेयर भूमि बाढ़ की चपेट में आती है। इसमें सबसे ज्यादा बाढ़ग्रस्त होने वाला क्षेत्र कैथल और सबसे कम यमुनानगर का है।

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इसरो और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने जारी किया है बाढ़ प्रभावित इलाकों का एटलस
एनआरएससी और इसरो बहु दिवसीय सैटेलाइट एवं सेंसर डाटा से वास्तविक समय में बाढ़ की मैपिंग और निगरानी कर एटलस बनाया गया है, जिसकी मदद से बाढ़ के हॉट स्पॉट पहचाने जा सकते हैं। साथ ही यह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और बाढ़ की सीमा की जानकारी देने के साथ वहां संरचनात्मक, गैर संरचनात्मक तथा प्राकृतिक एवं सामाजिक उपाय करने में सहायक है। यह एटलस बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान में मदद करता है।

इससे क्षेत्रीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों एवं बाढ़ प्रबंधन रणनीतियों के विकास, नुकसान को रोकने के लिए आपातकालीन उपाय, बुनियादी ढांचे के विकास की योजना बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही बाढ़ से होने वाले नुकसान की निगरानी और आकलन भी किया जा सकता है। इस एटलस को इसी वर्ष मार्च में जारी किया गया है।
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जिले             बाढ़ प्रभावित क्षेत्र

कैथल                         27185 हेक्टेयर
पलवल                         10474 हेक्टेयर
कुरुक्षेत्र                        10271 हेक्टेयर
सोनीपत                        8885 हेक्टेयर
फरीदाबाद             7085 हेक्टेयर
अंबाला                         2271 हेक्टेयर
पानीपत                         901 हेक्टेयर
करनाल                         575 हेक्टेयर
यमुनानगर             205 हेक्टेयर
कुल                         67852 हेक्टेयर

प्रमुख बाढ़ आपदाएं और प्रभावित जिले

वर्ष                         बाढ़ आपदाएं                                                             प्रभावित हुए जिले
2019    अगस्त के तीसरे सप्ताह में लगातार बारिश                                                 05
2018 जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई मूसलाधार बारिश                                     02
2010 नौ-19 जुलाई, चार से नौ अगस्त एवं 12 से 26 सितंबर तक लगातार बारिश 12
2008 पांच से आठ अगस्त तक मूसलाधार बारिश                                                 03
2004 छह से नौ अगस्त तक लगातार बारिश                                                 04
1998 16 से 20 अगस्त तक मूसलाधार बारिश                                                             03
1996 जून में अत्यधिक बारिश                                                                         04
1988 22 से 26 सितंबर तक मूसलाधार बारिश                                                 02
1983 मूसलाधार बारिश                                                                                     04
1978 मूसलाधार बारिश                                                                                     02
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अत्यधिक बारिश और बर्फ पिघलने से ही प्रदेश में आती है बाढ़

हरियाणा में आने वाली बाढ़ रिवररीन है, यानि यह नदी संबंधी बाढ़ है। यह बाढ़ तब आती है, जब भारी वर्षा या बर्फ पिघलने के कारण यमुना नदी अपने उफान पर होती है। इसकी गति धीमी भी हो सकती है और तेज भी। हरियाणा सीधे तौर पर किसी बड़ी नदी पर स्थित नहीं है। पड़ोसी राज्यों से होकर बहने वाली प्रमुख नदियों में यमुना, घग्गर, मारकंडा, साहिबी हैं।
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