करनाल। भारतीय खाद्य निगम अब तीन महीने से अधिक पुराना चावल राइस मिलों से सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) के रूप में नहीं लेगा। इसके लिए निगम ने बाकायदा एफसीआई केंद्रों पर लैब में टेस्टिंग की व्यवस्था की है। इस नई व्यवस्था से वर्षों से चले आ रहे चावलों के उस पुनरचक्रण को तोड़ने की तैयारी है। जिसमें अक्सर सीमांत राज्यों से पीडीएस का चावल खरीदकर सीएमआर की पूर्ति किए जाने के मामले सामने आते हैं। यह व्यवस्था उन राइस मिलर्स के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, जो चावलों के पुनरचक्रण से जुड़े हैं।
अक्सर ऐसे आरोप लगते हैं कि राइस मिलर्स यूपी व अन्य राज्यों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का चावल बेहद सस्ते में खरीदकर अपने राइस मिलों में जमा कर लेते हैं। इसी चावल को भारतीय खाद्य निगम को सीएमआर के रूप में दे देते हैं। एफसीआई से फिर यह चावल पीडीएस में जाता है और राइस मिलों के जरिए फिर एफसीआई पहुंच जाता है। यह चक्र चलता रहता है। इससे राइस मिलर्स को तिहरा फायदा होता है। चावल की कीमत में बड़ी बचत होती, दूसरी सीमांत किसानों के नाम पर गेटपास लेकर बिना धान लाए ही खरीदारी करके सरकारी रेट ले लेते हैं। तीसरा फायदा उसके उतराई, लदाई, मिलिंग आदि भी मिलती है।
अब सरकार फोर्टिफाइड चावल मिश्रित कराकर लेती तो पुराने चावल को उसमें मिलाना और आसान हो जाएगा लेकिन इस पुनरचक्रण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। भारतीय खाद्य निगम ने अब मिक्सड इंडीकेटर मैथड लागू कर दिया है। एफसीआई करनाल के सहायक महाप्रबंधक (गुणवत्ता नियंत्रण) विनोद कुमार मीना ने बताया कि इस मैथड के तहत लैब में चावल का परीक्षण किया जाएगा। जिसमें यह स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर चावल कितना पुराना है।
यदि चावल पुराना मिला तो उसे तत्काल प्रभाव से अस्वीकार कर वापस कर दिया जाएगा। इसका बड़ा फायदा एफसीआई के पास ताजा चावल आएगा और ताजे चावल को केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को वितरित कर पाएगी। इधर विभागीय अधिकारी मानते हैं कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों को गुणवत्ता परक चावल मिल सकेगा। दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि जब यह चावल सीएमआर में लिया ही नहीं जाएगा तो इसे राइस मिलर्स खरीदेंगे ही क्यों, जब खरीदेंगे नहीं तो पीडीएस के चावल की कालाबाजारी भी रुकेगी। इस बार सीएमआर के चावल में 50 प्रतिशत फोर्टिफाइड चावल लेने की शर्त भी लगाई जा चुकी है।
मिक्सड इंटीकेटर मैथड में तीन केमिकल्स होंगे। जिनके मिश्रण में चावल को गुजारा जाएगा। यदि हरा और हल्का हरा (एवोकाडो ग्रीन) रंग आएगा तो ही चावल को स्वीकार किया जाएगा। यह रंग तभी आएगा, जब चावल की मिलिंग (कुटाई) तीन महीने के अंदर की गई होगी। इसके अलावा पीला, पीला नारंगी या नारंगी जो चावल के स्टॉक को पुराने का संकेत होगा, उसे तत्काल प्रभाव से अस्वीकार कर दिया जाएगा।
- विनोद कुमार मीना, सहायक महाप्रबंधक (गुणवत्ता नियंत्रण) एफसीआई करनाल