माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि का असर घर से बाजार तक दिखने लगा है। चाय वाला हो या फिर कोई पेंशनर्स, व्यापारी हो या फिर उद्योगपति, गृहिणी हो या किसान। महंगाई से हर कोई त्रस्त है। वहीं कोरोना काल में ही घरेलू गैस सिलिंडर की कीमतें दो गुनी हो चुकी हैं।
रसोई गैस और मोटरसाइकिल-स्कूटर अब हर घर की जरूरत बन चुकी है। यही कारण है कि सिलिंडर के साथ ही डीजल व पेट्रोल की खपत भी बढ़ चुकी है। डीजल का सीधा असर खेतिहर किसानों के साथ-साथ बड़े उद्योगों तक पड़ता है। ट्रांसपोर्ट पर डीजल की महंगाई का सबसे अधिक असर है। दाल हो या मसाले, सरसों का तेल हो या फिर घी, कपड़े हो या फिर घरों में प्रयोग होने वाला कोई अन्य सामान, सब कुछ प्रभावित हुआ है। इतना ही नहीं, इसका सीधा प्रभाव करनाल की कृषि उपकरण उद्योग पर भी पड़ा है, जिससे यहां डिमांड में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। महंगाई का असर शहर के बाजारों में भी साफ दिख रहा है। लोगों का कहना है कि
केंद्र सरकार ने पहले तो कहा कि वह कंपनियों की बजाय सीधे उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी देगी, लेकिन कोरोना काल के दौरान गैस सिलिंडरों पर सब्सिडी बंद कर दी गई है। अब गैस सिलिंडर की कीमत 909 रुपये तक पहुंच चुकी है, जो अमीर हो या गरीब, सभी को चुकानी पड़ रही है।
इन पर अधिक पड़ी महंगाई की मार
-कच्चा लोहा 50.30 रुपये प्रति एससीएम, ईंट 6.50 प्रति पीस, सीमेंट 380 से 400 रुपये प्रति कट्टा, सरसों का तेल 165 से 200 प्रति लीटर, चीनी 44 से 45 रुपये प्रति किलो, आटा 25 रुपये किलो, घरेलू गैस 909 रुपये प्रति सिलिंडर, कपड़ा 15 से 25 प्रतिशत महंगा, पेट्रोल 104.57 रुपये प्रति लीटर के पार, डीजल 96.46 रुपये प्रति लीटर के पार, दवाइयों का रॉ मैटेरियल 25 प्रतिशत महंगा। सोना 49500 रुपये प्रति दस ग्राम तो चांदी 66500 प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।
पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई का बड़ा प्रभाव कृषि उपकरण उद्योग पर पड़ रहा है। दो महीनों के दौरान पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) में नौ रुपये प्रति एससीएम का इजाफा हो चुका है। कच्चे लोहे (इंगट) के भाव में 47 हजार से 49 हजार रुपये प्रति टन पहुंच गया है, जिससे उपकरण भी महंगे हो गए। इस कारण बाजार में मांग घट गई है।
- भावुक मेहता, महासचिव करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन।
महंगाई लगातार बढ़ रही है। घरेलू गैस की कीमत 909 रुपये तक पहुंच गई। अमीरों को तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन गरीबों को बहुत फर्क पड़ता है। महंगाई को नियंत्रित तो करना ही है, इसलिए जो मन पसंद की चीजें अक्सर बनाया करती थी, वह कम कर दी है।
-साबी चौधरी, गृहिणी करनाल
मैं चाय की दुकान पर काम करता हूं, 170 रुपये रोजाना मिलते हैं, लेकिन महंगाई का आलम यह है कि चीनी 44 रुपये प्रति किलो, आटा 125 रुपये का पांच किलो, सभी दालें 100 रुपये प्रति किलो से ऊपर चली गई है। ऐसे में काम तो उतनी आमदनी में ही चलाना होता है।
चंद्रप्रकाश, कर्मचारी टी स्टाल करनाल
जो पेंशन मिलती है, उससे गुजारा करना है। महंगाई इतनी बढ़ गई है। ऐसे में पहले अक्सर कार का इस्तेमाल करता था लेकिन अब बेहद आवश्यक होने पर ही कार से जाता हूं। बिजली महंगी हो गई है, जिससे बहुत आवश्यक होने पर ही बिजली का इस्तेमाल करता हूं।
ओपी सचदेवा, पेंशनल बिजली बोर्ड करनाल
ईंटों के दाम पांच रुपये के स्थान पर छह रुपये हो गए हैं, सीमेंट, सरिया और रेत बजरी के दामों में भी भारी इजाफा हो गया है। कई साइट पर काम चल रहा था लेकिन अब उनका बजट अत्यधिक बढ़ जाने के कारण कार्य को रोकना पड़ रहा है।
हरमीत सिंह हैप्पी, बिल्डर करनाल
सराफा बाजार में ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है, क्योंकि महंगाई के कारण लोगों का बजट बिगड़ गया है, जो लोग पहले 15 से 20 तोला तक सोना खरीदते थे, अब वह सिर्फ तीन से चार तोला तक की खरीदारी कर रहे हैं। अब सिर्फ लोग काम चला रहे हैं।
जगदीश चंद्र बब्बर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नेहरू पैलेस मार्केट एसोसिएशन
महंगाई के कारण लोगों ने शादियों का बजट भी कम कर दिया है। पहले छोटे मोटे फंक्शन में भी फोटोग्राफी का बड़ा पैकेज देते थे अब बड़ी शादियों में ही आधे से भी कम बजट पर कर रहे हैं। कैमरे, फ्लैश, स्टैंड, बैटरी आदि महंगा हो गया है।
अमित कुमार, संचालक फोटो स्टूडियो नेहरू पैलेस करनाल
डीजल-पेट्रोल का वास्तविक रेट इतना नहीं है लेकिन सरकारी टैक्स के कारण इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। इस कारण सब कुछ महंगा हो रहा है। आम आदमी का जीवन प्रभावित होने लगा है। सरकार को इस पर तत्काल विचार करना चाहिए।
कृष्ण लाल तनेजा, प्रधान हरियाणा व्यापार मंडल करनाल
आयुर्वेदिक दवाइयों के रॉ मेटेरियल की कीमतें डेढ़ गुना बढ़ चुकी हैं। जड़ी बूटियां 50 प्रतिशत, ट्रांसपोर्टेशन 20 प्रतिशत बढ़ चुका है। इसे नियंत्रित करने के लिए उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया लेकिन माल महंगा होने के कारण डिमांड घट गई।
संजय बत्रा, प्रधान-इंडस्ट्रियल प्रमोशन वेलफेयर एसोसिएशन