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आधे से ज्यादा स्कूलों ने खरीदवा ली किताबें, तब जागा विभाग

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शिक्षा विभाग की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी निजी स्कूल संचालक अभिभावकों को किसी एक दुकान से पुस्तकें और वर्दी आदि खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश अब जारी हुए हैं, जबकि जिले में आधे से ज्यादा स्कूलों ने विद्यार्थियों से किताबें और वर्दी अपनी मनमर्जी की दुकान से खरीदवा ली हैं। मार्च के अंतिम 10 दिनों में शहर में कई जगह निजी स्कूलों के नजदीक ही निजी प्रकाशकों ने टेंट लगाकर किताबें बेचीं। अमर उजाला ने इस मुद्दे को 27 मार्च के अंक में प्रमुखता से उठाया था।
दरअसल, पहली अप्रैल को नया सत्र शुरू होता है, लेकिन कई निजी स्कूलों ने 15 मार्च के बाद ही नॉन बोर्ड कक्षाओं के परिणाम जारी करते हुए उन्हें अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिया। नई कक्षाओं में आए विद्यार्थियों का किताबें और वर्दी खरीदने का सिलसिला शुरू हो गया था। अब तक आधे से ज्यादा स्कूलों द्वारा बच्चों से किताबें और वर्दी खरीदवा ली गई हैं। टेंट लगाकर किताबों की बिक्री का मामला जब अमर उजाला ने उजागर किया तो कई जगहों से टेंट में लगे किताबों के स्टॉल हट गए थे। उस समय भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। किसी स्कूल या निजी प्रकाशक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब विभाग के आदेश आने के बाद भी अधिकारियों का कहना है कि शिकायत आएगी तो जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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विद्यालय शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक की ओर से जारी हुए आदेशों के अनुसार, निजी विद्यालय अपने यहां अध्ययनरत विद्यार्थी को किसी एक अनुशंसित दुकान से न केवल पुस्तकें और लेखन सामग्री खरीदने के लिए, बल्कि जूते, जुराब, वर्दी इत्यादि लेने के लिए भी बाध्य नहीं कर सकते। यदि किसी स्कूल के खिलाफ ऐसी शिकायत आती है तो उसके खिलाफ हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियमावली 2003 के अनुसार कार्रवाई होगी।
लाखों रुपये कमीशन के चक्कर में लूटे जा रहे अभिभावक
कई स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की पुस्तकें अपने चहेते दुकानदारों के पास रखकर अभिभावकों को वहीं से पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इस खेल से स्कूलों को लाखों रुपये का कमीशन मिलता है। इतना ही नहीं हर साल निजी स्कूल पुस्तकें बदल देते हैं ताकि बच्चे पुरानी पुस्तकों का प्रयोग ही न कर सकें और हर साल मजबूरी में उन्हें नई किताबें ही खरीदनी पड़ें।
एनसीईआरटी की पुस्तकें नहीं लगा रहे निजी स्कूल
सरकार ने गत वर्ष एक्ट में संशोधन करके और फरवरी माह में पत्र जारी कर सभी स्कूल संचालकों को एनसीईआरटी की पुस्तकें हर कक्षा में लागू करने के आदेश दिए थे, इसके बावजूद आज तक इन आदेशों का अनुपालन इक्का-दुक्का निजी स्कूल को छोड़कर कोई भी नहीं कर रहा है। न ही आज तक जिला शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों की जांच कर कोई ठोस कार्रवाई की। इसी का परिणाम है कि निजी स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
तीन गुना महंगे दामों पर बिक रहीं निजी प्रकाशकों की किताबें
27 मार्च को जब अमर उजाला ने दयाल सिंह कॉलोनी और सेक्टर-7 में लगे टेंट पर किताबों की पड़ताल की तो दोनों जगह स्थानीय स्कूलों की ही किताबों की बिक्री हो रही थी। कक्षाओं के हिसाब से तैयार सेट में भी एनसीईआरटी की एक-दो किताबों को छोड़कर अन्य सभी किताबें निजी प्रकाशकों की थी। जिनके दाम एनसीईआरटी की किताबों से तीन गुना ज्यादा थे। यहां किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावकों ने भी बताया था कि उन्हें स्कूल की ओर से अनुशंसित की गई किताबें कहीं ओर से नहीं मिलीं।
शिकायत का इंतजार क्यों, बच्चों के बैग चेक करके करें कार्रवाई
शिक्षा के लिए काम कर रहे एडवोकेट राजकुमार और अभिभावक एकता मंच के प्रधान दिनेश नरूला का कहना है कि अधिकारी शिकायत का इंतजार क्यों कर रहे हैं। कई स्कूलों ने सरेआम किताबें बेची हैं। इन स्कूलों के विद्यार्थियों की रैंडम बैग चेक करके देखे जा सकते हैं। यदि इनमें निजी प्रकाशकों की किताबें हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।
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विभाग के आदेश हैं कि कोई भी स्कूल किताबें और वर्दी आदि किसी एक दुकानदार से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकता। न ही निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाई जा सकती हैं। यदि ऐसा कोई स्कूल कर रहा है तो अभिभावक शिकायत दें, सख्त कार्रवाई की जाएगी। - राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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