संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ब्राजील की तर्ज पर भारत में भी गन्ने से इथेनॉल बनाने पर जोर दिया गया है। केंद्र सरकार ने आम बजट में 2025 तक ईंधन में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इथेनॉल रहित ईंधन पर दो रुपये प्रति लीटर टैक्स लगा दिया है। इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से ईंधन को लेकर भारत की गल्फ देशों पर निर्भरता कम होगी। नई औद्योगिक इकाईयां स्थापित होंगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
गन्ने की मांग बढ़ने से किसानों के भी वारे न्यारे होंगे। अनुसंधान क्षेत्र को गन्ने से इथेनॉल व बिजली बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली गन्ने की प्रजातियां ईजाद करने की दिशा में भी काम करना पड़ेगा। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। इस केंद्र से विकसित गन्ने की किस्में उत्तर भारत के हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व बिहार में 92 प्रतिशत क्षेत्रों में लगाई जाती हैं।
बिजली व अधिक इथेनॉल उत्पादन देने वाली नई किस्में करेंगे विकसित
ब्राजील में गन्ने से चीनी बनाने के बजाय इथेनॉल बनाने पर उद्योग को स्थानांतरित किया जा रहा है। भारत सरकार भी इथेनॉल निर्माण पर जोर दे रही है। अभी तक उद्देश्य था कि गन्ना किस्मों से किसान व चीनी मिलें संतुष्ट हों। अब गन्ने से बिजली उत्पादन व इथेनॉल उत्पादन दोनों बिंदुओं पर काम होगा। बिजली उत्पादन के लिए ऐसी प्रजातियां विकसित करेंगे जिनमें बॉयोमास ज्यादा हो। ‘एनर्जिक केन’ के विकास की दिशा में अनुसंधान चल रहा है। इथेनॉल के लिए भी किस्म निकालने पर शोध किय जा रहा है जिससे ज्यादा इथेनॉल निकल सके।
डॉ. एसके पांडे, अध्यक्ष, गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल
रोजगार के अवसर होंगे सृजित
देश में गन्ने का रकबा करीब 51 लाख हेक्टेयर रहता है। गन्ने की खेती से किसानों, श्रमिकों व उद्योगों सहित देश के करीब 1.20 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। करीब 600 चीनी मिलें चीनी निर्माण कर रही हैं। सभी के पास इथेनॉल इकाई नहीं है। इस दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ईंधन में 10 प्रतिशत मिश्रण की जरूरत को पूरा करने के लिए 2020-21 में देश में 320 करोड़ लीटर इथेनॉल की मांग के अनुरूप 285 करोड़ लीटर इथेनॉल सप्लाई हुआ है।
डॉ. बक्शी राम, पूर्व निदेशक, गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर