इनोवा गाड़ी में सीट के नीचे अलग से बॉक्स बनाया हुआ था जिसके अंदर यह तीनों कंटेनर रखे हुए थे।
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विस्फोटक को सुरक्षित अपने लक्ष्य तक ले जाने के लिए आतंकियों ने पूरी तैयारी की थी। इनोवा कार में पिछली सीट के नीचे तीन अलग-अलग बॉक्स बनाए गए थे। इसमें ही आईईडी (विस्फोटक) के तीनों कंटेनर रखे हुए थे। ऐसे में चारों आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस को पहले विस्फोटक हाथ नहीं लगे। पूछताछ में भी आतंकियों ने इसकी जानकारी नहीं दी। इसके बाद जब बम निरोधक दस्ते को बुलाकर रोबोटिक चेकिंग कराई गई, तब जाकर लोहे के कंटेनर में आईईडी बरामद हुई।
दरअसल पुलिस को सटीक सूचना मिली थी कि संबंधित इनोवा कार में भारी मात्रा में विस्फोटक हैं, लेकिन चारों आतंकियों की गिरफ्तारी और तलाशी के बाद पिस्टल, कारतूस और 1.30 लाख रुपये की नगदी बरामद हुई। सभी आरोपियों से छह मोबाइल भी ले लिए गए, लेकिन विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इस पर पुलिस ने उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन जब पुख्ता और सटीक सूचना का हवाला दिया गया तो पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने बीडीडीएस, एफएसएल व डॉग स्क्वायड बुलाकर सघन तलाशी कराई।
जब बम निरोधक दस्ते ने इलेक्ट्रानिक डिवाइस से कार की स्क्रीनिंग की तो घंटी बज उठी। सभी समझ गए कि कार में बारूद है। इसके बाद कार को सावधानीपूर्वक थाने परिसर में सुनसान क्षेत्र में खड़ा करके रोबोट से सर्च कराया गया तो पिछली सीट के नीचे तीन अलग-अलग बाक्स मिले, लेकिन समस्या फिर जस की तस थी।
क्योंकि लौह कंटेनर देखकर ये समझ में ही नहीं आया कि ये बम हो सकते हैं। फिर एक बार लोहे के कंटेनरों को स्कैन कराया गया तब जाकर जानकारी हुई कि इसमें आईईडी है। लोहे सहित प्रत्येक का भार करीब ढाई किलो था। तीनों कंटेनर बड़ी तबाही मचाने में सक्षम बताए जा रहे थे। इसके बाद इन्हें डिफ्यूज कराने की प्रक्रिया कराई गई। इस दौरान रोबोट द्वारा डिफ्यूज करने की प्रक्रिया के दौरान एक धमाका भी हुआ, लेकिन ये सामान्य प्रक्रिया बताई गई।