मंगलवार तड़के 3:54 बजे सिविल अस्पताल को सूचना देकर एंबुलेंस मंगाई गई। मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने के साथ ही एंबुलेंस से तरावड़ी, नीलोखेड़ी और सिविल अस्पताल लाया गया। चार मृतक श्रमिकों के शवों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उनकी आंखें नम थीं और किस्मत को कोसते मिले।
पहले एक एंबुलेंस भेजी, फिर 15 और बुलाईं
सिविल अस्पताल के एंबुलेंस के फ्लीट मैनेजर ने इमारत गिरने की सूचना पर एक एंबुलेंस तरावड़ी भेजी, लेकिन मौके पर पहुंचने पर हादसा बड़ा मिला। जिसके बाद 15 एंबुलेंस और भेजी गईं। घायलों को अस्पताल ले जाने में 16 एंबुलेंसी लगीं।
मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले चंदन की उम्र महज 28 और संजय की 27 साल है। दोनों के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी। दो साल पहले अपने परिवार के साथ करनाल में कामकाज के लिए आए थे। दोनों के छोटे बच्चे हैं। वे अगले महीने छुट्टी लेकर बिहार जाने वाले थे।