करनाल। प्रदेश सरकार की ओर से आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा कराने के आदेश दिए गए हैं लेकिन निजी स्कूल संचालक और अभिभावक इससे सहमत नहीं हैं। वहीं विद्यार्थी भी चिंतित हैं। अभिभावकों और स्कूल संचालकों का कहना है कि इस वर्ष आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा नहीं करवानी चाहिए, क्योंकि कोरोना के चलते बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाए।
बोर्ड परीक्षा की बात सुनकर बच्चे भी चिंतित हैं। यदि सरकार को बोर्ड की परीक्षा करानी ही है तो अगले वर्ष से कराए। सरकार ने परीक्षा को लेकर स्कूलों पर पंजीकरण करवाने का दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है लेकिन निजी स्कूल संचालक इसका विरोध कर रहे हैं, जिसको लेकर मुख्यमंत्री के साथ आगामी दिनों में बातचीत होनी है। जिले भर में लगभग 1680 राजकीय और निजी स्कूल हैं जिनमें करीब 15 हजार विद्यार्थी आठवीं कक्षा के हैं।
कोरोना के चलते पहले ही बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर सके। वे परीक्षा को लेकर ठीक से तैयार नहीं हैं। ऐसे में अचानक बोर्ड परीक्षा के डर से वे तनाव में आ सकते हैं। इसलिए सरकार को अगले वर्ष से बोर्ड की परीक्षा लेनी चाहिए।
- हरजीत, प्रधानाचार्या एसबीएस स्कूल
बच्चे बोर्ड की परीक्षा का नाम सुनकर ही घबरा रहे हैं, क्योंकि उन्हें कोरोना काल में स्कूल आकर पढ़ाई करने का मौका नहीं मिला। कोरोना के चलते ऑनलाइन पढ़ाई वे ठीक से नहीं कर सके। इसलिए सरकार को यह बात समझनी चाहिए।
- धनेश, प्रधानाचार्य एसडी बाल मंदिर स्कूल
बच्चे लंबे समय तक स्कूल से दूर रहे और अब एकदम बोर्ड की परीक्षा का नाम सुनकर घबरा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा अगले वर्ष से होनी चाहिए। निजी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा को लेकर सरकार को अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- रेनू गुप्ता, प्रिंसिपल एसडी सीसे स्कूल
बच्चे कोरोना काल में स्कूल नहीं जा सके, जिस कारण परीक्षा को लेकर उनकी तैयारी पूरी नहीं है। इसलिए सरकार को अगले वर्ष से ही बोर्ड की परीक्षा करवानी चाहिए।
- प्रदीप सेन, अभिभावक
कोरोना काल में बच्चे स्कूल नहीं जा सके। उन्होंने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की है। जबकि ऑनलाइन पढ़ाई उतनी सुगम नहीं है। बच्चे ठीक से नहीं पढ़ पाए। इसलिए इस बार बोर्ड की परीक्षा नहीं होनी चाहिए।
- प्रीति
वर्जन- फोटो- 55
सरकार की ओर से केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय को छोड़कर अन्य बोर्ड के बच्चों को आठवीं की परीक्षा दिलाने के लिए संबंधित स्कूलों को पंजीकरण करवाने के निर्देश दिए हैं।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी