माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। छठ पूजा के लिए सरकार ने पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं लेकिन करनाल में अभी तक घाट व नहरी विभाग की तैयारियां अधूरी हैं। शनिवार से पर्व शुरू होने जा रहा है। फिर भी प्रशासन पश्चिमी यमुना नहर के डेढ़ किलोमीटर लंबे किनारे को साफ नहीं कर पाया। साफ सफाई के नाम पर यहां औपचारिकता पूरी हो रही है। दावा तो यह किया जा रहा है कि यहां मजदूर लगे हैं, लेकिन केवल घाट की सीढ़ियों पर ही झाडू लगा है, जबकि नहर के अंदर किनारों पर गंदगी पसरी है। हालात यहां दावों को गलत साबित करने के लिए काफी है। काछवा पुल से लेकर कैथल पुल तक दोनों तरफ डेढ़ किलोमीटर एरिया में मेला लगता है। हर साल 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां सूर्यदेव को अर्घ्य देने के अलावा पर्व की अन्य रस्में अदा करने के लिए पहुंचते हैं।
गहरे पानी की जानकारी देने को नहीं लगी रेलिंग, अस्थायी घाट नहीं बनाया गया
नहर कई जगह काफी गहरी है। इस दौरान भीड़ भी ज्यादा होती है। सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकें, इसके लिए रैलिंग लगानी होती है। शुक्रवार की शाम तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। भीड़ यदि ज्यादा हो जाए तो स्नान करने वाले श्रद्धालु दूसरी जगह मिल जाए। इसके लिए अस्थायी घाट बनाए जाने चाहिए थे। शाम तक इस दिशा में भी कुछ नहीं हुआ। यह तैयारी एक दो दिन पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी।
अधिकारियों के जवाब ने किया निराश : प्रधान
छठ पर्व सेवा समिति मंडल के प्रधान सुरेश यादव बताते हैं कि सभी सदस्य सिचाई विभाग के एससी और एक्सईएन से मिल चुके हैं, उनका कहना है कि दिल्ली में छठ पर्व के अवसर पर पानी देना जरूरी है, बाद में यहां पश्चिमी यमुना नहर में पानी की व्यवस्था करेंगे। इसको लेकर श्रद्धालुओं में काफी रोष है। श्रद्धालु दलीप महतो का कहना है कि आज से नहाय खाय के साथ पूजा शुरू हो रही है, ऐसे में पानी न आना अच्छी बात नही है, प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। श्रद्धालु पवन ने बताया कि नहर के अंदर अभी भी काफी गंदगी पड़ी है उसे भी साफ नहीं किया गया। छठ पर्व सेवा समिति मंडल के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मिलकर घाट की सफाई करवाई है। नहर में 24 अक्तूबर को भी पानी नहीं आना अच्छी बात नहीं है। पूर्वांचल के लोगों के लिए ये बड़ा पर्व है।
नहर की सफाई करवा दी है। अभी पानी का स्तर कुछ कम है। कल तक पानी का स्तर बढ़ जाएगा। पीछे से ही यमुना का पानी दिल्ली की ओर डायवर्ट किया गया है।
- रणबीर त्यागी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग