अक्सर लोग दूसरों की देखा देखी में या फिर मोबाइल पर विज्ञापन देखकर नए एप को मोबाइल फोन में इंस्टाल कर लेते हैं और फिर साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। नकली सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप से बढ़ते अपराध को देखते हुए पुलिस ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है।
करनाल के एसपी गंगाराम पूनिया का कहना है कि नकली एप या नकली सॉफ्टवेयर साइबर अपराधियों की ओर से डाटा चोरी करने के लिए भी बनाए जाते हैं। देखने में और कार्य करने में ये असली एप की तरह ही लगते हैं, जिनमें केवल नाममात्र सा अंतर होता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई नई एप कम समय में ज्यादा लोगों ने डाउनलोड की है तो यह नकली एप होने का संकेत हो सकता है। एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले उसके जारी होने की तारीख भी जांचें। एप की पूरी पड़ताल के बाद ही उसे डाउनलोड करें।
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नकली एप या सॉफ्टवेयर की ऐसे करें पहचान और बचाव
- एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले उसके निर्माता के बारे में गूगल पर शोध जरूर करें।
- नकली एप या सॉफ्टवेयर निर्माता नकली एप को असली एप के जैसा दिखने वाला बनाते हैं। इसीलिए उसे डाउनलोड करने से पहले प्रत्येक अक्षर को ध्यान से पढे़ं, इसमें फेरबदल हो सकता है।
- नकली एप मोबाइल के डाटा संबंधी ज्यादा अनुमति मांगते हैं, जबकि वास्तव में इसकी जरूरत नहीं होती है।
- डिवाइस में सॉफ्टवेयर अपडेट केवल अपनी डिवाइस की सेटिंग से ही करें। वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफार्म या एप से डिवाइस को अपडेट न करें व वायरस से सुरक्षित रखने के लिए एंटी वायरस इंस्टाल करके रखें।
- ई-मेल, पॉप अप, इंस्टेंट मैसेज या सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सॉफ्टवेयर या एप के लिंक या विज्ञापनों पर क्लिक न करें।
- विश्वसनीय माध्यमों से फाइलें, एप, सॉफ्टवेयर और प्लग इन डाउनलोड करें।