माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। चावल का निर्यात कम होने से देश में बासमती की कीमत घट रही है। विदेशों में भारतीय चावल में रसायन की अधिक मात्रा बताकर खरीद रोकी तो सरकार व वैज्ञानिकों का भी ध्यान इस ओर गया है। हालांकि करनाल जिले को चावल का कटोरा कहा जाता है, लेकिन जिले के नीलोखेड़ी क्षेत्र में उत्पादित चावल को दुनिया के कई देशों में पसंद किया जाता है। यही कारण है कि यहां का चावल सर्वाधिक निर्यात होता है। जिससे देश को अच्छी खासी मुद्रा भी मिलती है। लेकिन पिछले पांच सालों में चावल की कीमत में भी गिरावट आई है। जिस पर वैज्ञानिकों ने भी चिंता जताई है। अब किसानों को रासायनिक खादों से जैविक खादों की ओर ले जाने का प्रयास बड़े स्तर पर करने की जरूरत बताई है।
पांच साल पहले 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल थे भाव
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि एक दशक से दुनिया में भारत इसका सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है। लेकिन हैरानी है कि यूरोपीय संघ और ईरान जैसे बड़े आयातक देशों के विभिन्न बाजारों में, चावल में कीटनाशकों के अंश, एमआरएल यानी अधिकतम अवशेष सीमा से ज्यादा पाए जाने के कारण चावल के निर्यात में दिक्कत आ गई है। कई देशों ने आयात करना ही बंद कर दिया है। यूरोपीय संघ ने ट्राईसाईक्लोजोल के एमआरएल को प्रति किलो 0.01 मिलिग्राम निर्धारित किया है। इसका प्रभाव किसानों को उनकी उपज के मंहगे दाम मिलने पर भी पड़ा है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि किसानों ने अनियंत्रित तरीके से कीटनाशकों व रसायनों का प्रयोग किया है। धान में सिर्फ उन्हीं कीटनाशकों का प्रयोग किया जाना चाहिए जो इस फसल के लिए विभागीय तौर पर अनुमोदित हैं। इनका प्रयोग फसल व जमीन में कब उचित है, इसे पैकिंग के लेबल पर भी देखा जाना चाहिए। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रचार निदेशक डॉ. एसके सचान ने बताया कि 5 साल पहले बासमती धान की कीमत 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब घटकर 3000 रुपये तक रह गई है। इसका मुख्य कारण चावल की गुणवत्ता खराब होना है।
ये हैं बासमती की उन्नत प्रजातियां
देश के चावल उत्पादित सात राज्य जम्मू, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बासमती धान की 33 उन्नत प्रजातियां कृषि वैज्ञानिकों की ओर से विकसित की गई हैं। इनमें हरियाणा बासमती नंबर 1 व 2, तरावड़ी बासमती, पूसा तथा पंजाब बासमती नंबर 2, 3, 4 व 5 प्रमुख हैं। किसानों के लिए गुणवत्ता के आधार पर तरावड़ी बासमती, रणवीर बासमती और सीएसआर-30 बेहतर पारंपरिक प्रजातियां भी हैं। उच्च गुणवत्ता के कारण इनकी उपज से देश-विदेश में अधिक मूल्य मिलता है।
दवाओं के प्रयोग से लेनी चाहिए उचित सलाह
धान में दवाओं के प्रयोग से पहले गांव-गांव में उपलब्ध कृषि विकास अधिकारी, खंड व उपमंडल कृषि अधिकारी, जिले के उप कृषि निदेशक कार्यालय से किसानों को निशुल्क व उचित परामर्श लेना चाहिए।
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180 देशों में निर्यात होता है चावल
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व प्रचार निदेशक डॉ. एसके सचान ने कहा कि स्वतंत्रता के समय देश मे अनाज नहीं था, बाहर से मंगवाते थे। अब इतना पैदा कर दिया कि रखने की जगह नहीं है। जहां तक बासमती की बात है भारत इसका प्रमुख निर्यातक है और यहां का चावल 170-180 देशों में निर्यात किया जाता है।