105: असंध : नव विवाहित जोड़ा विक्रम सिंह व उनकी पत्नी ।
असंध। दहेज प्रथा ने समाज की जड़ो को खोखला करने का काम किया है। जिसके चलते समाज में बेटियां पिता पर बोझ सी लगने लगी हैं। इस प्रथा को समाप्त करने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। तभी समाज में सुधार लाया जा सकता है।
यह कहना है गांव सालवन में शादी करने आए गांव अैंगध (निसिंग) वासी विक्रम सिंह का। विक्रम सिंह ने सालवन गांव में शादी में दिए 11 लाख रुपये के दहेज को न लेकर युवा पीढ़ी को एक संदेश दिया है। विक्रम सिंह पेशे से कैथल के सरकारी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं। विक्रम सिंह ने बताया कि दहेज के कारण बहुत से घर बर्बाद हो रहे हैं। बेटियों को मारा जा रहा है।
एक पिता अपनी हैसियत से ज्यादा अपनी बेटी को दहेज के रूप में देकर कर्जदार हो रहा है। कई बार तो पिता को बेटी की शादी करने के लिए जमीन तक बेचनी पड़ती है। ऐसे में एक परिवार को खुश करने के लिए दूसरे परिवार को दुखी होना पड़ता है। इसी सोच को बदलने के लिए उन्होंने किसी दूसरे से नहीं बल्कि अपने आप से शुरूआत की है। समाज को बदलने के लिए युवाओं का जागरूक होना बहुत जरूरी है। दहेज प्रथा एक बहुत बड़ी बुराई है। जिसका चलन ज्यादा बढ़ गया है। इसको रोकना सबकी जिम्मेदारी है।