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स्वच्छ सर्वेक्षण में पिछड़ा करनाल, 17वें से खिसक 86वें पर आया

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देश और प्रदेश में स्वच्छता के मामले में अग्रणी रहने वाला करनाल स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 के परिणामों में पिछड़ गया है। पिछले साल 17वें स्थान पर रहा करनाल इस बार रैंकिंग में खिसक कर 86वें स्थान पर चला गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छ सर्वेक्षण परिणाम की घोषणा की। इसमें 86वां रैंक और कार्यक्षमता के आधार पर करनाल को गोल्ड (अनुपम) अवार्ड मिला है। वहीं नीलोखेड़ी नगर पालिका को सिल्वर (उज्जवल) अवार्ड मिला है।
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सर्वेक्षण में पिछड़ने के पीछे शहर में पहले के मुकाबले स्वच्छता की कमी मानी जा रही है। दरअसल लंबे समय से करनाल में नाइट स्वीपिंग का कार्य ठप है, सफाई होना तो दूर अब तक टेंडर भी नहीं हुआ है। इसी तरह कचरा निस्तारण के मामले में भी कार्य संतोषजनक नहीं है। हालांकि करनाल नगर निगम की ओर से इस बार शहर को टॉप-10 में लाने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन अधूरी व्यवस्थाओं ने इन दावों की हवा निकाल दी। विदित हो कि केंद्रीय आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय की ओर से फरवरी 2021 में देश के 4320 शहरों का सर्वेक्षण किया गया था। इनमें 1 से 10 लाख तक की आबादी के शहर लिए गए थे, जिनमें करनाल नगर निगम भी शामिल था। ब्यूरो
प्रतिस्पर्धा बढ़ी, अन्य शहरों ने हमसे अच्छा कार्य किया : मेयर
मेयर रेणू बाला गुप्ता का कहना है कि स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में 86वां स्थान करनाल को मिला है। पहले हम 17वें स्थान पर थे। प्रतिस्पर्धा भी पहले से बढ़ी है, अन्य शहरों ने हमसे अच्छा कार्य किया, लोगों से अनुरोध है कि स्वच्छता में हमारा सहयोग करेंगे, ताकि भविष्य में हम टॉप रैंकिंग में आ सकें।
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कोरोना का पड़ा असर, अब शहर साफ : उपायुक्त
उपायुक्त निशांत कुमार यादव का कहना है कि बीते डेढ़ दो सालों में कोविड से जन जीवन और सफाई व्यवस्था पर असर पड़ा था, लेकिन अब शहर साफ-सुथरा हो रहा है। उम्मीद है कि अगले सर्वेक्षण में करनाल देश के शहरों की स्वच्छता प्रतिस्पर्धा में टॉप-10 में आ सकता है। इसके लिए सभी को प्रयास करने होंगे।
नीलोखेड़ी को बधाई, करनाल के लिए करेंगे मेहनत : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि गोल्ड अवार्ड के लिए करनाल के साथ प्रदेश के गुरुग्राम और रोहतक शहर को भी चुना गया है। नीलोखेड़ी का अवार्ड के लिए चयन होना भी खुशी की बात है। इसके लिए वहां के नागरिक और सफाईकर्मी बधाई के पात्र है। करनाल के लिए हमें और मेहनत करनी होगी।
ये थे सर्वेक्षण के पैरामीटर-
- नगर निगम : वार्डों से निकलने वाले कचरे का 75 प्रतिशत से अधिक निस्तारण, कुल कचरे की 81 प्रतिशत से अधिक निस्तारण क्षमता, सूखे कचरे का भी 81 प्रतिशत से अधिक निस्तारण व क्षमता, सीएनडी वेस्ट का 40 प्रतिशत से अधिक निस्तारण, कुल कचरे या वेस्ट का अधिकतम 15 प्रतिशत लैंडफिल में जाना और ओडीएफ प्लस-प्लस शामिल है। इस श्रेणी में करनाल की कार्यप्रणाली गोल्ड अवार्ड के लिए ही रही।
- नगर पालिका : वार्डों से निकलने वाले कचरे का 55 प्रतिशत से अधिक निस्तारण, कुल कचरे की 71 प्रतिशत से अधिक निस्तारण क्षमता, सूखे कचरे का भी 71 प्रतिशत से अधिक निस्तारण व क्षमता, सीएनडी वेस्ट का 30 प्रतिशत से अधिक निस्तारण, कुल कचरे या वेस्ट का अधिक्तम 20 प्रतिशत लैंडफिल में जाना और ओडीएफ प्लस शामिल है। इस श्रेणी में नीलोखेड़ी की कार्यप्रणाली सिल्वर अवार्ड के लिए रही।
नोट : स्वच्छता रैंकिंग की खबर में यह बॉक्स भी लगाया जाए।
अब तक यह रही करनाल की रैंकिंग-
वर्ष रैंकिंग
2017 65वां स्थान
2018 41वां स्थान
2019 24वां स्थान
2020 17वां स्थान
प्रदेश में भी पहले से खिसक तीसरे पायदान पर आया करनाल
गत वर्ष तक करनाल प्रदेश में स्वच्छता के मामले में पहले पायदान पर था। इस बार रैंकिंग घटने से प्रदेश में भी खिसक कर तीसरे पायदान पर आ गया है। पहले स्थान पर गुरुग्राम और दूसरे स्थान पर रोहतक ने जगह बनाई है। सीएम सिटी होने के बाद भी रैंकिंग में पिछड़ने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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पिछड़ने के पीछे यह भी वजह-
- नाइट स्वीपिंग बंद हो गई।
- सार्वजनिक शौचालयों पर भी ताले लटके हैं।
- बाजार और कालोनियों में कचरा पसरा दिखाई देता है।
- कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सफाई भी नियमित नहीं रही।
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