कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ईरानी कालीन को पर्यटक खूब पसंद कर रहे हैं। इस 8310 फीट की ईरानी कालीन की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये है। इसके सात अलग-अलग डिजाइन हैं। जिन्हें भदोई (यूपी) के कारीगर ब्रह्मसरोवर लेकर पहुंचे हैं। इन ईरानी कालीन पर बेहद ही महीन और बारीकी से कारीगरी की गई है, जिसे हाथ से तैयार किया गया है। इस एक कालीन को तैयार करने में ही एक साल से ज्यादा का समय लगता है, जिस पर दो कलाकार मिलकर काम करते हैं। इस कालीन को तैयार करने में 14 किलो मैरिनो वुल धागे का इस्तेमाल होता है। हालांकि ईरानी कालीन का छोटा साइज भी कारीगरों लेकर आए है, जिसकी कीमत 15 हजार रुपये से शुरू है।
स्टॉल नंबर 106 पर भदोई से आए शाहनवाज अहमद ने बताया कि वह पिछले सात साल से गीता जयंती पर स्टॉल लगा रहे हैं। उनका पूरा कारोबार केवल कालीन से जुड़ा है और यह उनका पुश्तैनी काम है। छोटी ईरानी कालीन को छह महीने तथा बड़ा कालीन को तैयार करने में एक साल का समय लगता है, जिसे दो कलाकार बनाते है। इन कालीन को तैयार करने में मैरिनो वुल धागे का इस्तेमाल होता है, जिसमें करीब 14 किलो धागा लगता है। इस एक किलो मरीनो धागे की कीमत ही पांच हजार रुपये है। वह ईरानी कालीन को ईरान में तैयार कराकर आयात करते हैं। उन्होंने बताया कि सात साल के दौरान गीता जयंती में उनकी 20 से 30 बड़ी कालीन बिक चुकी है। इसके अलावा सूरजकुंड मेले, इंटरनेशनल ट्रेड फेयर सहित अन्य बड़े मेले में भी कालीन की खूब बिकती है। वहीं छोटी कालीन की बिक्री बेहद ज्यादा होती है और उसकी मार्केट में खूब मांग भी है। ग्राहकों की मांग को देखते हुए वह लोग अलग-अलग डिजाइन, रंग और साइज में कालीन आयात करते हैं।
ईरानी कालीन की तर्ज पर तैयार की भारतीय कालीन
शाहनवाज अहमद ने बताया कि ईरानी कालीन की तर्ज पर उन्होंने भारतीय कालीन का डिजाइन तैयार किया है। यह डिजाइन हूबहू ईरानी कालीन से मिलता जुलता है। इस भारतीय कालीन की कीमत 70 हजार रुपये से शुरू है। इस कालीन को तैयार में छह महीने का समय लगता है। इसमें भी अन्य तरह के मैरिनो वुल का इस्तेमाल होता है।