करनाल। वेतन बढ़ोतरी और सरकार की घोषणाओं को लागू कराने सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत प्रदेश भर की आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स ने सोमवार से करनाल में महापड़ाव शुरू कर दिया। अनिश्चितकाल तक चलने वाले इस महापड़ाव में हिस्सा लेने के लिए सभी जिलों से वर्कर्स और हेल्पर्स पूरी तैयारी के साथ आईं हैं। सुबह से करनाल में बसों, कारों और ट्रेन से वर्कर्स के जत्थे करनाल पहुंचने शुरू हो गए थे। दोपहर तक सभी सेक्टर-12 फव्वारा पार्क में डटीं। इसके बाद पुराने कमेटी चौक पर धरना दिया। शाम चार बजे से चौक को ब्लॉक करके वर्कर्स यहां सड़क पर बैठी हैं। पूरे शहर में देर शाम तक जाम की स्थिति रही।
तालमेल कमेटी के बैनर तले प्रदेश भर की आंगनबाड़ी वर्कर्स सेक्टर-12 फव्वारा पार्क में एकत्रित हुईं। यहां से जुलूस निकालते हुए कुंजपुरा रोड से कमेटी चौक पर पहुंचीं। हालांकि प्रेमनगर स्थित सीएम आवास का घेराव करने का उन्होंने एलान किया था लेकिन बीच रास्ते में कमेटी चौक को ही प्रदर्शनकारी महिलाओं ने ब्लॉक कर दिया।
बोले, चार साल से लंबित घोषणाएं लागू कराने के लिए कर रहीं संघर्ष
महापड़ाव की अध्यक्षता तालमेल कमेटी की नेता शकुंतला, देवेंद्री शर्मा, पुष्पा दलाल, कृष्णा शर्मा, आंगनबाड़ी फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊषा रानी, महासचिव एआर सिंधु, सीआईटीयू राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन और प्रदेश महासचिव जय भगवान ने की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सितंबर 2018 को मानदेय में वर्कर्स के 1500 रुपये और हेल्पर्स की 750 की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। हरियाणा सरकार चार साल से ये पैसा ले रही है लेकिन वर्कर्स और हेल्पर्स को नहीं दे रहीं। इसी तरह मुख्यमंत्री ने मार्च 2018 में वर्कर्स को कुशल और हेल्पर को अर्धकुशल का दर्जा देते हुए मानदेय तय किया था और महंगाई भत्ते के साथ जोड़ दिया था। ये घोषणा भी लागू नहीं हुई।
मांगें माने जाने तक करनाल में ही डटेंगे
कमेटी की वरिष्ठ नेता शकुंतला, देवंद्री शर्मा और तपन सेन का कहना है कि 70 दिन से महिलाएं सरकार की घोषणाओं को लागू कराने के लिए सड़क पर बैठी हैं। ये सरकार का गलत रवैया है। जब तक मांगें नहीं मानी जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदेश के सभी जिलों में महिलाएं अलग-अलग धरने दे रही थी। अब सीएम सिटी में सामूहिक रूप से आवाज बुलंद करेंगे। अब तक पांच बार सरकार बातचीत के लिए बुला चुकी है लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनी।
आक्रोश महापड़ाव में सोमवार की मध्यरात्रि को विश्राम करती आंगनबाड़ी वर्कर्स।