करनाल। परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी जमीन बंटवारे के चलते जिले के 39456 किसान सीमांत किसानों की श्रेणी में आ गए हैं। इनके पास एक से ढाई एकड़ तक ही कृषि भूमि रह गई है। यह राजस्व विभाग का आंकड़ा है। यही वजह लग रही है कि इस बार गेहूं की फसल बेचने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर जिले के 55903 किसानों ने पंजीकरण करवाया है।
अन्य जिलों की तुलना में करनाल जिला पंजीकरण के मामले में प्रथम स्थान पर है। प्रधानमंत्री किसान निधि के तहत जिले के 95127 किसानों के खाते में सम्मान राशि आ चुकी है। 39224 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करवाया। इससे लग रहा है कि सीमांत किसानों के पास गेहूं की घरेलू खपत के बाद बेचने के लिए गेहूं नहीं बचता। सीमांत किसानों की आजीविका कैसे कायम रहेगी इस पर भारतीय कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गुरबचन सिंह ने अनुसंधान किया है। संवाद
एकीकृत कृषि प्रणाली अपनानी होगी
डॉ. गुरबचन सिंह ने काछवा गांव स्थित गुरबचन सिंह फाउंडेशन एंड रिसर्च एजुकेशन एंड डेवलेपमेंट सेंटर पर एकीकृत कृषि प्रणाली स्थापित की है। ढाई एकड़ जमीन में फसल, सब्जी उत्पादन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन, देसी मुर्गी पालन एवं अंडा उत्पादन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, बकरी पालन व फल उत्पादन कर तीन वर्ष तक आमदनी का आकलन किया। उनका अनुभव है कि प्रति वर्ष इस प्रणाली से चार लाख तक का शुद्ध मुनाफा संभव है। किसान को रोजाना आमदनी प्राप्त होगी। अच्छी आज अर्जित करने के लिए किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली अपनी होगी। परंपरागत गेहूं-धान फसल चक्र के फेर में किसान कर्ज तले दब जाता है। उसके खर्च पूरे नहीं हो पाते। वे अपने केंद्र पर बहुउद्देश्यीय कृषि प्रणाली के लिए किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण देंगे। इस प्रणाली के तहत उत्पादन पर लागत खर्च भी मात्र 20 प्रतिशत ही रह गया है।
कृषि के साथ जुड़े कई व्यवसायों पर सरकार अनुदान देती है। हमारी ओर से सरकार से अपील की जाएगी कि एकीकृत कृषि प्रणाली पर एक साथ अनुदान का प्रावधान किया जाए। प्रत्येक गांव में इस तरह के पांच मॉडल स्थापित किए जाएं। इस मॉडल से रोजाना किसान की आमदनी होगी। -डॉ. गुरबचन सिंह पूर्व अध्यक्ष भारतीय कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल
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कृषि विभाग उपनिदेशक कार्यालय से प्राप्त आंकड़े
जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 246510 हेक्टेयर
कृषि भूमि 212118 हेक्टेयर
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में किसान परिवार 84433
सीमांत किसान 39456 (एक से ढाई एकड़ तक)
छोटे किसान 16355 (ढाई से पांच एकड़ तक)
बड़े किसान 28321 (पांच एकड़ से ऊपर)
प्रधानमंत्री किसान निधि के तहत अब तक पंजीकृत किसान 97055
प्रधानमंत्री किसान निधि सम्मान प्राप्त करने वाले किसान 95125
2021-22 रबी सीजन में गेहूं की फसल बेचने के लिए
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत हुए 55903
जिले में इस वर्ष गेहूं का रकबा 1.75 लाख हेक्टेयर
गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल
जौ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1635 रुपये प्रति क्विंटल
चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5230 रुपये प्रति क्विंटल
मसूर न्यूनतम समर्थन मूल्य 5500 रुपये प्रति क्विंटल
सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य 5050 रुपये प्रति क्विंटल