अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सहकारी शुगर मिल करनाल की ओर बकाया पड़ी 38 करोड़ रुपये की राशि के भुगतान को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार मिल के मुख्य गेट पर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान महापंचायत आयोजित की गई। इस दौरान किसानों ने नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया।
किसानों ने एकमत फैसला लिया कि अगर 23 जुलाई तक किसानों की मांगों को नहीं माना गया तो 24 जुलाई को करनाल-मेरठ रोड पर किसान महापंचायत बैठा कर जाम कर दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी मिल प्रशासन की होगी। मुख्य गेट पर महापंचायत के बैठ जाने से मिल के अंदर व बाहर आने जाने का रास्ता बंद हो गया। इसकी भनक लगते ही मिल के प्रबंध निदेशक प्रद्युमन सिंह पैदल चलकर किसान महापंचायत में आकर किसानों के बीच बैठ गए। इस बीच किसानों ने मुख्य गेट पर टेंट लगाने का कार्य शुरू करते हुए अनिश्चितकालीन महापंचायत बैठाने का एलान कर दिया। इस बीच कई बार प्रबंध निदेशक प्रद्युमन सिंह ने आंदोलित किसानों को रास्ता खाली करने व मिल स्थित किसान विश्राम गृह में बैठ कर बातचीत करने का आग्रह किया, लेकिन बरसात के बीच किसान महापंचायत को उठाने के लिए भाकियू कार्यकर्ता टस से मस नहीं हुए। प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने पूरे प्रदेश में निजी व सहकारी मिलों की ओर करीब 400 करोड़ रुपये की राशी बकाया है। महापंचायत में ब्याज सहित पूरा बकाया अदा करने की सरकार से जोरदार मांग उठाई गई। प्रदेश अध्यक्ष मान ने कहा कि भाकियू के तत्वाधान में की गई बड़ी जद्दोजहद के बाद गत 20 जनवरी को मुख्यमंत्री ने कई मंत्रियों के साथ नया मिल लगाने व जल्द कार्य शुरू करने का एलान किया था, लेकिन 6 माह का समय बीत जाने के बाद एक ईंट भी नहीं लग पाई है। प्रबंध निदेशक प्रद्युमन सिंह ने महापंचायत के बीच किसानों से 7 दिन का समय मांगते हुए कहा कि इस अवधि के बाद पेमेंट हो जाएगी और नई मिल लगाने की तिथि भी तय कर दी जाएगी। प्रबंध निदेशक प्रद्युमन सिंह के इस आग्रह को मानते हुए भाकियू ने ये एलान करते हुए महापंचायत को एक सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए कहा कि अगर तय अवधि के दौरान उक्त मांगे पूरी नहीं हुई तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी मिल प्रशासन की होगी।
बरसात में डटे रहे आंदोलनकारी
किसान मिल गेट पर मांगों को लेकर आयोजित किसान महापंचायत में मौजूद सैकड़ों किसान बरसात में डटे रहे। करीब 3 घंटे चली किसान महापंचायत के दौरान रुक रुक तेज बरसात होने का सिलसिला जारी रहा। प्रबंध निदेशक प्रद्युमन सिंह भी इस स्थिति में किसानों के बीच जमे रहे। हालांकि, उन्होंने किसानों को रेस्ट हाउस चलने की बात भी कही, लेकिन किसानों ने रेस्ट हाउस जाने से इंकार कर दिया।
ये रखी किसानों ने मांग
किसानों के गन्ने की बकाया राशी का एक एक पैसे का तुरंत भुगतान किया जाए। सरकारी निर्देशों के मुताबिक बकाया राशी पर 15 प्रतिशत वार्षिक दर के हिसाब से किसानों को ब्याज की अदायगी की जाए। एक सप्ताह के अंदर नई मिल लगाने का कार्य शुरू किया जाए या निर्माण कार्य की तिथि तय की जाए। मिल के मौजूदा केन मैनेजर पर कई किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की जांच की जाए।
किसान महापंचायत में ये रहे मौजूद
प्रदेश उपाध्यक्ष स. सुरेंद्र सिंह घुम्मन, प्रेमचंद शाहपुर, श्याम सिंह मान, मेनपाल बुढ़ा, जिला कुरूक्षेत्र प्रधान बलविंद्र सिंह जेनपुर, जिलाध्यक्ष यशपाल राणा, सतपाल बड़थल, बाबूराम बड़थल, मेहताब कादियान, नीलम राणा, सुरेंद्र सांगवान, श्याम सिंह चौहान, सुनील संगवाल, नेकीराम, सतीश कलसोरा, डॉ. सत्यवीर तौमर, विनोद राणा, बाबू डाबरथला, ओमपाल मढ़ाण, राजेंद्र सांगवान, नरेश चौधरी, शक्ति सिंह, बबलू सोहाना, लक्ष्मण राणा, संजीव नजीर पुर, तिलकराज, गजे सिंह टापू, जागीर सिंह, ओमपाल कादियान, महक सिंह, इनाम खांन, नरेश कुमार खट्टर, कृष्ण महमदपुर, फतेह सिंह मंगलोरा, आभेराम, करेशन लालू पुरा, कृष्ण सदरपुर, महेंद्र सुलतान पुर सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।