201: एनडीआरआई में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजुद वैज्ञानिक। अमर उजाला
करनाल। राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में अंडाणु पिक-अप इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (ओपीयू-आईवीएफ) तकनीक पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व कर्नाटक राज्यों के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए 11 प्रतिभागियों (सहायक प्रोफेसर या उससे ऊपर) को प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रतिभागी अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। समापन समारोह में प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक डॉ. एमएल मदान ने प्रमाण पत्र प्रदान किए।
डॉ. एमएल मदान ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे और अनुभवी संकायों के साथ राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान उन्नत प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकासात्मक गतिविधियों में सबसे आगे एवं एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने निश्चित रूप से प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभागियों के ज्ञान और कौशल को समृद्ध किया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंडाणु पिक-अप प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतरीन तकनीकों में से एक है जो ज्ञात वंशावली के जीवित जानवरों के अंडाशय से अंडाणु के संग्रह की अनुमति देता है और इसके अलावा पीढ़ियों के बीच के अंतराल को भी कम करता है। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि भविष्य में इस तरह के और प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। समापन समारोह में डॉ. धीर सिंह, डॉ. सचिनंदन डे, डॉ. टीके मोहंती, डॉ. रूबीना बैथालू और डॉ. नरेश सेलोकर उपस्थित रहे।
तो बड़ी संख्या में बछड़ों का हो सकता है उत्पादन
संस्थान के निदेशक डॉ. एमएस चौहान ने कहा कि आम तौर पर एक गाय से हम उसके जीवनकाल में पांच से आठ बछड़े प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन ओपीयू-आईवीएफ तकनीक का उपयोग करके एक गाय बड़ी संख्या में बछड़ों का उत्पादन कर सकती है। इस प्रकार यह गिर, साहिवाल, लाल सिंधी जैसे बेहतर स्वदेशी जर्मप्लाज्म को गुणा करने में सबसे अच्छी तकनीकों में से एक है। इसके अलावा पर्थक वीर्य (सेक्स सीमन) के उपयोग से भी इस तकनीक का बेहतर उपयोग किया जाता है।