सीवन। नियमित योग ने सीवन निवासी 15 वर्षीय गौरव कुमार की जिंदगी बदल दी है। दरअसल, बचपन से मिर्गी के दौरों से पीड़ित गौरव को जब दवाओं से राहत नहीं मिली, तब उन्होंने योग की राह पकड़ी और योगाभ्यास ने उन्हें एक नई दिशा दी—नई जिंदगी दी।
गौरव ने बताया कि अब वह 15 साल के हैं और बीते कई वर्षों से योग कर रहे हैं। उसने बताया कि परिजनों के अनुसार, जब वह मात्र डेढ़ महीने के थे, जब उन्हें पहली बार मिर्गी का दौरा पड़ा। इलाज चला, दवाएं भी चलीं, लेकिन बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही थी।
इसी बीच, कुछ वर्षों पहले उसकी मुलाकात एक योग शिक्षक से हुई। उन्होंने उसे बताया कि किस प्रकार योग, विशेष रूप से प्राणायाम और ध्यान, मिर्गी जैसी बीमारी से राहत दिला सकता है।
नियमित योग से नहीं पड़ा दौरा ः गौरव ने जब से योग को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया, तब से उन्हें शारीरिक दृष्टिकोण से बहुत राहत है। रोज़ाना वह प्राणायाम, ध्यान और कुछ विशेष आसनों का अभ्यास करते हैं। अब कई साल हो चुके हैं, और उन्हें मिर्गी का एक भी दौरा नहीं पड़ा।
गौरव के पिता रामपाल भावुक होकर बताते हैं- बचपन में बेटे की हालत देखकर हम सब बेबस थे। तमाम इलाज कराए, पर स्थायी राहत नहीं मिली। योग ने हमारे बेटे को दोबारा ज़िंदगी दी है।
स्वामी रामदेव का जताया आभार ः गौरव नई जिंदगी का श्रेय उस योग शिक्षक को देते हैं, जिन्होंने समय निकालकर उसे मार्गदर्शन दिया। साथ ही वह भारत में योग को जन-जन तक पहुंचाने वाले स्वामी रामदेव को भी धन्यवाद देते हुए कहते हैं- स्वामी रामदेव जैसे व्यकि्त ने हरियाणा की धरती पर जन्म लेकर हमें योग की शक्ति सिखाई। आज हम जैसे बच्चों को उनके प्रयासों से नया जीवन मिल रहा है। संवाद