कैथल। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की दीवार के दूसरी ओर मुख्य मार्ग पर स्थित दो सड़क के बेशकीमती प्लाट में निर्माण कार्य को लेकर शनिवार को विवाद खड़ा हो गया। यहां एक व्यक्ति ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। जिसकी भनक लगने पर ईओ नगर परिषद कुलदीप मलिक की अगुवाई में बड़ी संख्या में नगर परिषद के कर्मचारी थाना शहर में पहुंचे। जहां पुलिस को एक शिकायत देकर निर्माण कार्य रुकवाने के लिए लिखित में दिया। निर्माण कार्य करवा रहे व्यक्ति का कहना है कि उनके पास न्यायालय के आदेश हैं कि नगर परिषद इस प्लॉट में दखलंदाजी नहीं कर सकती।
घटनाक्रम के अनुसार शनिवार की सुबह राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गीता भवन के बाजार वाली साइड में सड़क के दूसरी ओर खाली पड़े प्लाट पर जेसीबी से नींव खुदाई का काम शुरू किया गया। जिसकी सूचना मिलने पर ईओ नगर परिषद कुलदीप मलिक सहित नगर परिषद के कर्मचारी पुलिस थाना शहर में पहुंचे। जहां एसएचओ रोहताश को लिखित में दिया गया कि न्यायालय द्वारा जिस प्रॉपर्टी आईडी को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं, वह प्रॉपर्टी आईडी दूसरी है, उसकी जगह दूसरी प्रॉपर्टी आईडी पर निर्माण कार्य किया जा रहा है।
उधर, पुलिस थाने में पहुंचे निर्माण कार्य करवा रहे व्यक्ति रामनारायण ने कहा कि उसने इस प्लॉट को नियमानुसार नरवाना निवासी जगरूप से खरीदा था। उसके पास इसके लिए असेसमेंट, नक्शा सहित पटवारी से तस्दीक किए हुए कागजात व रजिस्ट्री है। यहां निर्माण कार्य को लेकर नगर परिषद द्वारा उसे बेवजह परेशान किया जा रहा है। जबकि न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट लिखा है कि इस प्लॉट पर निर्माण कार्य को लेकर नगर परिषद द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद उसे तीन दिनों से परेशान किया जा रहा है।
ईओ नगर परिषद कुलदीप मलिक ने कहा कि कोर्ट ने जिस प्रॉपर्टी आईडी को लेकर फैसला दिया है, वह प्रॉपर्टी आईडी 1956 है। जबकि निर्माण कार्य प्रॉपर्टी आईडी नंबर 356 पर किया जा रहा है। इसी कारण पुलिस को लिखित में शिकायत देकर काम रुकवाने के लिए कहा गया है। उन्हें कहा गया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि न्यायालय ने इसी प्रॉपर्टी नंबर 356 को लेकर आदेश पारित किए गए हैं या किसी अन्य प्रॉपर्टी के। दूसरी ओर इस संबंध में डीसी कार्यालय द्वारा वर्ष 2020 में केस दर्ज करने के लिए लिखे गए पत्र का रिमांइडर भी 18 मार्च को भेजकर केस दर्ज करने के लिए लिखा गया है।
नगर परिषद के कर्मचारियों पर बड़ा सवाल
यदि यह जमीन सरकारी है तो उन नगर परिषद कर्मचारियों व अधिकारियों पर बड़ा सवाल उठता है, जिन्होंने इस जमीन को लेकर प्रॉपर्टी आईडी तैयार करवाई। प्रॉपर्टी आईडी के आधार पर ही रजिस्ट्री हुई और उसके बाद ही आगे के कागजात तैयार हुए। ऐसे में क्या प्रशासन उन नगर परिषद कर्मचारियों से जवाब मांगेगा, जिन्होंने असेसमेंट तैयार की है।
एसएचओ सिटी रोहताश ने कहा कि इओ के पत्र के आधार पर काम रुकवा दिया गया है। पहले डीसी द्वारा लिखे गए पत्र की उन्हें जानकारी नहीं है। 18 मार्च को जो पत्र लिखा गया है, उस पर कार्रवाई की जा रही है।
डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही पुलिस को पूर्व में भेजे गए पत्र पर कार्रवाई करने के लिए लिखा गया। साथ ही ईओ की ओर से पत्र भेजकर काम रुकवाने के लिए कहा गया है। डीएमसी को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि इसी सप्ताह इस मामले की जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
डेढ़ साल से कार्रवाई नहीं, फाग के दिन लिया डीसी ने संज्ञान तो दर्ज हुआ केस
हैरानी की बात तो यह है कि डीसी कार्यालय एसपी कार्यालय को इसी भूमि को लेकर 5 अक्तूबर 2020 को पत्र लिखता है लेकिन पुलिस इस पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लेती। मामले की जानकारी मिलते ही डीसी प्रदीप दहिया ने फाग की छुट्टी के दिन संज्ञान लिया और 18 मार्च को फिर से नगर परिषद ईओ ने डीसी के पत्र पर कार्रवाई के लिए फिर से पत्र लिखा। जिस पर पुलिस ने शनिवार 19 मार्च की सायं डीआरओ सुरेश कुमार की शिकायत पर केस दर्ज किया। जिसमें बताया गया कि इस मामले में कैथल के जगरूप की शिकायत पर जांच की गई थी। जिसमें खरादिया मोहल्ले के इस प्लॉट सहित एक अन्य रजिस्ट्री की शिकायत थी। इस मामले की जांच में नरवाना निवासी जगरूप, नरवाना निवासी रामनारायण, खुराना रोड वासी वैशाखी, वसीका लिखने वाले वसीका नवीस विजय शर्मा, प्रलेख लिखने वाले अधिवक्ता कुलदीप सिंह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। उसी जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।