करीब बारह घंटे में कैथल शहर में 112 एमएम पानी बरसा। वहीं पूरे जिले में औसतन 92 एमएम बारिश हुई। जिससे जिला मुख्यालय सहित जिले के सभी कस्बों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। बारिश से जिला वासियों को भीषण गर्मी से तो राहत मिली है, लेकिन खेतों में अधिक पानी भरने किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं किसानों का कहना है कि कपास, बाजरा व हरे चारे की फसलें तो बिल्कुल खराब होने के कगार पर हैं। जिले के कई क्षेत्रों में तो किसान फसल को बचाने के लिए इंजन लगाकर पानी को निकाल रहे हैं तो कई रिचार्ज बोर का सहारा ले रहे हैं।
मंगलवार-बुधवार की रात करीब तीन बजे बरसात शुरू हुई। सुबह तक शहर में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। शहर की सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी जमा हो गया। अंबाला रोड पर छोटू राम चौक से विश्वकर्मा चौक तक तो सड़क ने तालाब का रूप धारण कर लिया। ऐसा ही दृश्य ढांड रोड पर भी देखने को मिला। तेज रफ्तार से चल रहे कार चालकों और अन्य बड़े वाहन चालकों ने तो आमजन व दोपहिया वाहन चालकों का निकलना मुश्किल कर दिया। वहीं इंडोर स्टेडियम में भी पानी की निकासी की व्यवस्था न होने से पानी जमा हो गया है। बाजार, कॉलोनियां, पार्क, सड़कें, खाली मैदान सहित तमाम जगहों पर पानी भर गया। यहीं नहीं कच्ची बस्तियों में रह रहे सैकड़ों लोगों के घरों व भगत सिंह चौक, हिंदू स्कूल मार्ग पर कई दुकानों में भी पानी घुस गया। इस दौरान लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ अवरोध लगाने व बचाव में जुटे रहे। करनाल रोड विद्युत सदन के बाहर तो पानी इतना जमा हो गया कि वाहन चालक भी नहीं निकल पा रहे थे। वहीं गांव जसवंती में एक मकान की छत गिरने से दो बच्चे चोटिल हुए हैं।
आपदा एवं प्रबंधन विभाग के सदर नायब कानूनगो पूर्ण सिंह ने बताया कि बुधवार अल सुबह से ही बरसात हो रही है। यह रिपोर्ट सुबह आठ बजे तक की है। ढांड 130 एमएम, कैथल 112 एमएम, गुहला 93 एमएम, राजौंद 73 एमएम, सीवन 84 एमएम, पूंडरी 72 एमएम व कलायत 83 एमएम बरसात दर्ज की गई है। सबसे अधिक बारिश ढांड व सबसे कम बारिश पूंडरी में दर्ज हुई है।
शहर में करनाल रोड पर दोनों और खड़े दोपहिया वाहनों के पहिया डूबे दिखे, भगत सिंह चौक पर घुटनों तक पानी दिखाई दिया, लघु सचिवालय के गेट पर भी दो फीट तक पानी जमा हो गया, विद्युत भवन के बाहर सडक़ पर भी पानी जमा हुआ। स्टेट बैंक रोड पर भी बरसाती पानी की निकासी का प्रबंध नहीं, इस कारण से वाहन चालकों को घंटों तक पानी से ही गुजरना पड़ा। अंबाला रोड, ढांड रोड, करनाल रोड, जींद रोड, हनुमान वाटिका परिसर, बस स्टैंड के बाहर, ओवरब्रिज के नीचे चार नंबर स्कूल तक, अमरगढ़ गामड़ी की गलियों सहित अन्य कई सडक़ें भी जलमग्न हुई। अंडर ब्रिजों के नीचे भी पानी भर गया। काठमंडी रोड से भी वाहन चालकों को गुजरने में परेशानी हुई। माता गेट पर लोग पानी की निकासी के लिए अपने आप ही दिखे सीवरेज को खोलते हुए दिखाई दिए।
बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिल गई। लेकिन उन किसानों के लिए परेशानी बढ़ गई है, जिनकी फसलों में पानी पहले से ही जमा है। उसमें ज्यादा पानी होने के कारण फसल में नुकसान हो सकता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. रमेश चंद वर्मा ने बताया कि आगामी दो दिन तक बारिश होने के आसार हैं। बरसात से सब्जी की फसलों को तो काफी नुकसान है। धान की फसल में अभी इतने नुकसान की संभावना नहीं है। यदि कहीं पर पानी अधिक जमा है तो किसान इधर उधर निकाल लें।
राजौंद के गांव बीरबागड़ा में एक मकान की छत गिर गई। पिछले कई दिनों से हो रही बरसात से यह घटना हुई। गांव बीरबांगडा निवासी ओम ने बताया कि उसके पास एक ही कमरा था, जो सुबह हो रही बरसात होने के कारण गिर गया। संयोगवश उस समय वे मकान में नहीं थे। उसने बताया कि वह पहले ही कमजोर आर्थिक स्थिति से जूझ रहा है। कमरे की छत गिरने से उसकी स्थिति और भी बिगड़ गई है। मकान बनाने के लिए उसके पास कोई पैसा नहीं है। उसने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसकी मदद की जाए। संवाद