संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। ग्रामीण स्तर पर गोशालाओं को आर्थिक मदद न मिलने से भी सड़कों पर गोवंश की समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। दरअसल, शहर में तो व्यापारी वर्ग से जुड़े लोग गोशालाओं का संचालन करने में समर्थ होते हैं, लेकिन गांवों में स्थिति बेहद खराब है। यहां पर केवल दान व सरकार के सहारे ही गोशालाओं का संचालन होता है।
गौरतलब है कि कैथल जिले में भी ग्रामीण क्षेत्र में करीब आठ से 10 गोशालाएं हैं। इन गोशालाओं में अधिकतर केवल सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड का ही प्रयोग किया जाता है। जबकि बहुत कम दान राशि इन गोशालाओं में पहुंचती है।
गांवों की सड़कों पर भी है अधिक समस्या : शहर में अधिकतर सड़कें फोरलेन है। ऐसे स्थिति यहां पर गोवंश से हादसों से बचाव हो जाता है परंतु गांवों की सड़कों पर भी गोवंश होने की अधिक समस्या है। दरअसल, गांव की सड़कों पर न तो लाइट है और न ही यहां पर सड़कें चौड़ी हैं। इस कारण यहां पर लगातार रात के समय हादसों का भय बना रहता है। सीवन की गोशाला समिति के गो सेवक नरेंद्र ने कहा कि सीवन में सड़क तो दोहरी है, लेकिन यहां पर लाइटें नहीं लगी है। इस कारण यदि कोई गाेवंश सड़क पर होता है तो उसके साथ सड़क दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में गोवंश भी चोटिल होते है और वाहन चालक भी। कहा कि सरकार की ओर से जो आर्थिक सहायता दी जाती है, वह गोशाला की मांग के अनुसार नहीं है। ऐसे में गोशाला में चारे के संकट से लेकर अन्य प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं।