बसों की कमी की वजह से कैथल-जींद मार्ग पर बसे कई गांवों के विद्यार्थियों और अन्य ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि ग्रामीणों व विद्यार्थियों को बसों में लटकर यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने का अंदेशा है।
कैथल-जींद मार्ग पर गांव किठाना बसों के ठहराव के लिए बस स्टॉप बना हुआ है। यहां गांव किठाना, रोहेड़ा, माजरा, बड़सीकरी कलां, बड़सीकरी खुर्द, कमालपुर के साथ-साथ जींद जिले के गांवों लोधर, छातर, संडील, मांडी व थुआ के लोग व छात्र कैथल, चंडीगढ़ व दिल्ली के लिए बस पकड़ने पहुंचते हैं और बसों का इंतजार करते हैं।
हालांकि रूट पर बसों की संख्या कम हैं और यात्री ज्यादा। मगर जब कभी कोई बस यहां से गुजरती है तो वह अमूमन पूरी तरह भरी रहती है। ऐसी स्थिति में चालक भी यहां बस नहीं रोकते और ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर दौड़कर बस पकड़ते हैं। जबकि वहां इंतजार कर रहीं छात्राओं व महिलाओं के लिए बसों में सवार हो पाना संभव नहीं हो पाता। विद्यार्थियों का कहना है कि रोजाना सुबह यहां यही स्थिति होती है। जिस कारण वे अपने शैक्षणिक संस्थानों में भी समय पर नहीं पहुंच पाते।
कोई बस क्यू शेल्टर भी नहीं
यहां बने स्टॉप पर कोई बस क्यू शेल्टर भी नहीं हैं। जिस वजह से अत्यधिक गर्मी, सर्दी व बारिश में यहां खुले आसमान के नीचे बस का इंतजार करना बहुत मुश्किल बन जाता है। विद्यार्थियों व यात्रियों का कहना है कि यहां से चंडीगढ़, हांसी, कैथल, जींद, राजौंद, नरवाना, उचाना रूट पर जाने वाली बसें मिलती हैं। भीड़ इतनी हो जाती है कि बस चालक पहले उतरने वाले यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बसों को आगे या पीछे रोकते हैं। जिस कारण बस के रुकते ही उसमें सवार होने के लिए लोग दौड़ पड़ते हैं। इस भागदौड़ में छात्राएं पीछे रह जाती हैं। इसका बड़ा कारण यहां पहले की बजाय अब बसों के कम फेरे हैं। इस रूट पर कम से कम पांच और बसों की आवश्यकता है। जबकि इस समय यहां कई गांवों के लिए सिर्फ चार बसें ही हैं।
बस में चढ़ना संघर्ष जैसा
विद्यार्थी शुभम शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों की संख्या को ज्यादा देखकर बस के चालक बस को आगे पीछे रोक देते हैं। जिस कारण बस में सवार होने के लिए एक तरह से संघर्ष ही करना पड़ता है। भाग कर बच्चे बस में चढ़ने का प्रयास करते हैं। इस आपाधापी में कई छात्रों को चोट भी लग चुकी हैं। शिक्षण संस्थान में पहुंचने में देरी होती है। लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है।
बसों की संख्या बढ़ाएं
यात्री नानू ने बताया कि बसों की कमी से काफी समय तक किठाना चौक पर ही खड़े रहते हैं। विभाग को इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। ताकि यात्री व विद्यार्थी बसों से अपने गंतव्य तक समय पर पहुंच सकें।
बसों के फेरे भी बढ़ने चाहिए
विद्यार्थी संदीप, राजेंद्र, राजेश, मनदीप, सुरजीत, मनीष सहित अन्य ने कहा कि यहां विद्यार्थियों के लिए तो बस में सवार होना बहुत ही ज्यादा मुश्किल है। फिर भी जैसे-तैसे वे बसों में सवार होते हैं। कई बार बसें न मिलने के कारण कक्षाएं भी छूट जाती हैं। उनकी मांग है कि इस रूट पर विद्यार्थियों व यात्रियों की संख्या को देखते हुए सुबह के समय व दोपहर बाद छुट्टी के समय बसों के फेरे बढ़ाए जाएं।
समाधान के लिए प्रयास करेंगे
रोडवेज महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि नई बसें जनवरी महीने तक डिपो में आ जाएंगी। इसके बाद इस रूट पर जो समस्या बनी हुई है, उसके समाधान के लिए प्रयास करेंगे। किठाना में बसें बस स्टॉप से आगे व पीछे रोकने का मामला संज्ञान में नहीं है। कोई बस चालक यदि ऐसा करता है तो उसकी शिकायत करें, उसके खिलाफ अवश्य कार्रवाई की जाएगी।