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जीते किसान तो आढ़तियों के भी ‘जान में आई जान’

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The farmers who won't even the arhatiyas' 'life came to life' - फोटो : Kaithal
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कैथल। तीन कृषि कानूनों में के तहत देश में प्राइवेट अनाज मंडियां बनाई जा सकती थीं, जिस कारण हरियाणा और पंजाब में मौजूदा अनाज मंडी सिस्टम पर संकट के बादल छाए हुए थे। यही कारण है कि किसान के साथ ही आढ़ती में तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे। आढ़तियों को आशंका थी कि कहीं प्राइवेट मंडियां खुल गईं तो हजारों आढ़तियों की रोजी-रोटी का क्या होगा? अब जब कृषि कानून वापस लेने का एलान कर दिया गया है तो किसानों के साथ ही आढ़तियों के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई है। कैथल की अनाज मंडी में भी कृषि कानूनों की वापसी पर लड्डू बांटे गए।
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एक साल पहले जब तीन कृषि कानून लागू हुए थे तो प्रावधान के अनुसार कई किसानों ने धान को सीधा राइस मिलों में बेच दिया था। उन्हें धान मंडी में लेकर जाने की आवश्यकता नहीं थी। केवल एमएसपी पर धान बेचने के लिए मंडी में जाना पड़ा, जिससे मार्केट फीस कम हो गई थी। आढ़ती एसोसिएशन के अनसुार आढ़तियों की चिंता थी कि यदि कानून के प्रावधान अनुसार प्राइवेट अनाज मंडियां लागू हो गईं तो उनका क्या होगा? इसी कारण जब-जब किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया, जाम लगाने का फैसला लिया, तब-तब आढ़तियों ने किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। मंडियों से चंदा एकत्रित भी किया गया।
25000 से अधिक आढ़ती हैं हरियाणा में-
हरियाणा में लगभग 25000 से अधिक आढ़ती हैं। अकेले कैथल में ही लगभग एक हजार से अधिक आढ़ती काम करते हैं। 116 सक्रिय अनाज मंडी हैं, जिनमें आढ़तियों के अलावा लाखों की संख्या में मजदूर वर्ग व करोड़ों की संख्या में किसान वर्ग सीधा अनाज मंडियों से जुड़ा हुआ है।
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जिला आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी शोरेवाला ने कहा कि सरकार के इस फैसले से व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। व्यापारी व किसान पूरी तरह से खुश हैं। यदि ये तीनों कानून लागू हो जाते तो बड़े-बड़े व्यापारी आ जाते। आढ़ती नाम की संस्था ही खत्म हो जाती। अब जब प्राइवेट मंडियां ही नहीं आएंगी तो हरियाणा व पंजाब की मंडियां बनी रहेंगी। पूरे विश्व में हरियाणा व पंजाब की अनाज मंडियों की पहचान है।
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल गर्ग ने कहा कि तीनों कानून वापस लेने पर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हैं। इससे आढ़तियों को काफी राहत मिलेगी। आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन धर्मपाल ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के वापसी की घोषणा किसानों की जीत है।
पुरानी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम बहादुर खुरानिया ने कहा कि यह किसानों की जीत है। आढ़ती किसान से ही हैं। निश्चित रूप से इस निर्णय से आढ़तियों को भी राहत मिली है।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। उन्होंने कृषि कानून वापस लेकर किसानों, आढ़तियों, व्यापारियों व मजदूरों को बड़ा तोहफा दिया है।
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