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Kaithal News: आरकेएसडी प्रबंधक समिति पर सैकड़ों वोट काटने का आरोप

Wed, 22 Feb 2023 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। आरकेएसडी एवं आरवीएस प्रबंधन समिति में तीन कॉलेजियम सदस्यों सहित कई अन्य सदस्यों ने प्रबंधक समिति पर मनमाने ढंग से सात सौ से आठ सौ वोट काटकर अपने चहेतों के वोट बनाने का आरोप लगाया है।
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इन सदस्यों का कहना है कि समिति के नियमों के खिलाफ प्रबंधक समिति 11 हजार रुपये सदस्यता फीस निर्धारित कर अपने चहेतों के वोट बना रही है। जबकि पूर्व में लगभग 2590 वोटों के 26 लाख रुपये जमा हैं। उन वोटों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। वे इस फैसले का विरोध करते हैं। पूरी जानकारी जुटाकर वे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करेंगे। उधर, प्रबंधक समिति ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि सभी काम नियमानुसार किए जा रहे हैं।

मंगलवार दोपहर बाद मन्नत होटल में पत्रकारों से बातचीत में कॉलेजियम सदस्य एवं प्रधान साकेत कुमार के खिलाफ प्रधान पद का चुनाव लड़कर 21 में से चार कॉलेजियम सदस्यों की वोट हासिल करने वाले राधाकृष्ण मित्तल, कॉलेजियम सदस्य जयभगवान मित्तल, कॉलेजियम सदस्य धर्मप्रकाश मित्तल, आरवीएस सदस्य रविभूषण गर्ग, आरवीएस सदस्य राकेश सर्राफ, आरवीएस सदस्य सुरेश गेायल, आरवीएस सदस्य श्याम हजवाना ने ये आरोप लगाए। इनका कहा है कि आरवीएस के सदस्यों की सूची 3714 है। इनमें लोग आजीवन सदस्य हैं और न्यायालय के आदेश हैं कि प्रबंधक समिति इसमें से किसी का वोट नहीं काट सकती। उन्हें पता चला है कि आरकेएसडी कॉलेज की प्रबंधक समिति कॉलेज के 700 से 800 की आजीवन सदस्यता समाप्त कर चहेते लोगों को गैर संवैधानिक तरीके से सदस्य बना रही है। इनकी सदस्यता समाप्त करने का आधार मृत्यु बताई जा रही है, लेकिन सभी के मृत्यु प्रमाण पत्र तक नहीं लिए गए। इस काम के लिए जरनल हाउस की बैठक बुलाया जाना जरूरी था। उसमें यह सूची रखी जाए। जरनल हाउस की बैठक के लिए सभी सदस्यों को डाक से सूचना भेजी जाए।
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उन्होंने कहा कि नए वोट बनाने के लिए नाकायदा राष्ट्रीय समाचार पत्रों में सूचना दी जाए। इस संस्था के पूरे देश में सदस्य हैं। यदि संस्था निश्चित संख्या में नए सदस्य बनाना चाहती है तो अधिक आवेदन आने पर लॉटरी से फैसला लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आम जन को सदस्यता से वंचित रखने के लिए 1100 से बढ़ाकर फीस 11 हजार रुपये की गई है। जो गलत है। उन्होंने कहा कि 13 साल पहले 2590 वोटों के लिए 26 लाख रुपये कॉलेज में जमा है। नए वोट बनाने से पहले उनमें से ही वोट क्यों नहीं बनाए गए? इन सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रबंधक कमेटी शहर की अग्रणी शिक्षण संस्था पर कब्जा करना चाहती है। आरटीआई से इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी मांगी गई है।
सफाई ः जिला रजिस्ट्रार कार्यालय को है जानकारी

आरोपों पर आरवीएस एवं आरकेएसडी कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष साकेत मंगल एडवोकेट ने कहा कि अजय गर्ग एवं अन्य ने राज्य रजिस्ट्रार के यहां केस दायर किया है कि समिति ने मृत लोगों के वोट नहीं काटे हैं। इसी कारण समिति ने सात से आठ माह का समय लगाकर कमेटी का गठन कर मृत लोगों के वोट काटे हैं। यह फैसला 16 कॉलेजियम सदस्यों की बैठक में लिया था। इसकी पूरी जानकारी जिला रजिस्ट्रार कार्यालय को नियमानुसार दे दी गई है। साथ ही कॉलेज की वेबसाइट पर यह सूची उपलब्ध है। दो समाचार पत्रों में भी सूचना दी गई है। नए वोट बनाए जाने के आरोप निराधार हैं। रही बात नए वोट बनाने के लिए 11 हजार रुपये फीस की तो यह वर्ष 2014 में संविधान में जो परिवर्तन किया था, उसी में यह प्रावधान किया था। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
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