कैथल। कोरोना काल के डेढ़ साल बाद रविवार को जींद-कुरुक्षेत्र रेल रविवार सुबह 10 बजे कैथल स्टेशन पर पहुंची। जिसे लेकर उत्साहित यात्री बोले कि रेल जैसी कोई सवारी नहीं है।
स्टेशन मास्टर चिराग वालिया ने बताया कि जींद-कुरुक्षेत्र रेल अब एक्सप्रेस है, लेकिन यह सभी स्टेशनों पर रुकेगी। कुरुक्षेत्र से यह वापसी में शाम को करीब 7 बजे फिर कैथल पहुंचेगी। इससे जो लोग गीता महोत्सव देखना चाहते हैं, उनके लिए भी सहूलियत होगी। वे यात्री सुबह जाकर गीता महोत्सव देख सकते हैं और रात को इसी रेल से वापस भी आ सकते हैं। इसी तरह विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी राहत मिलेगी।
यात्री तरसेम ने बताया कि लगभग डेढ़ साल बाद पहली बार गाड़ी चली है। बहुत अच्छा लग रहा है। अब रेल निरंतर चलनी चाहिए। वह रेल में अपने बच्चों के साथ कुरुक्षेत्र जा रहे हैं। रेल की सवारी जैसी कोई सवारी नहीं है।
यात्री बीरमती ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र जा रही है। इससे बहुत खुशी है। बस में अधिक किराया लगता है। अब कुछ राहत मिलेगी।
यात्री बबिता ने बताया कि रेल चल पड़ी इसकी बहुत खुशी है। दो साल बाद रेल में आज पहली बार सफर करेंगी। पहले कुरुक्षेत्र जाना पड़ता था, तो बस में जाते थे। इसमें पैसे भी अधिक लगते थे और समय भी ज्यादा लगता था।
रेलयात्री कल्याण समिति ने भी रेल का संचालन होने पर खुशी जताई। सदस्यों ने रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर रेल के चालक का स्वागत किया और लड्डू खिलाए। लाजपतराय सिंगला, ओमप्रकाश मढाड, चेयरमैन सतपाल गुप्ता, ज्ञानचंद भल्ला, रामकरण, अश्वनी शर्मा, कृपाल सिंह, पवन शर्मा, बलवंत सिंह, संजीव थरेजा, सुरेंद्र अरोड़ा सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि समिति ने रेल सेवा संचालित करने की मांग की थी। जिसे अब पूरा किया गया है। इसके लिए सभी सदस्य रेलवे के आभारी हैं।