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सिंचाई बिन सूख रही धान की फसल

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बारिश में देरी, सूखी नहरें और महंगे डीजल ने किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। सिंचाई पानी उपलब्ध न हो पाने के कारण धान की फसल सूखे की मार झेल रही है। भीषण गर्मी के बीच चल रही लू ने कृषि क्षेत्र पर संकट के बादलों को ज्यादा गहरा कर दिया है।
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किसान मामू राम, सोमपाल राणा, कृष्ण राणा, मोनू, किरणपाल और अशोक ने बताया कि सिंचाई के पानी की जरूरत पूरी न होने के कारण धान के साथ-साथ पशु चारा नष्ट हो रहा है। जिस कृषि रकबे में भूमिगत जल कृषि योग्य है उनको जरूरत के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही। डीजल के दाम आसमान को छू रहे हैं। नहर और माइनर सूखे हैं। ऐसे में केवल इंद्रदेव की दया दृष्टि पर खेतीबाड़ी निर्भर होकर रह गई है। किसान फसल पैदा करने के लिए पसीना तो बहा सकता है। श्रम के पसीने से खेतों की सिंचाई संभव नहीं।
बरसात में देरी और नहरों में पानी की कमी के कारण सबसे ज्यादा संकट के बादल उन किसानों पर छाए हैं जो ठेके की भूमि पर कृषि करते हैं। ठेके के दाम प्रति एकड़ 45 हजार से 50 हजार रुपये हैं। यदि समय पर बरसात न हो तो किसान को आय की बजाय घाटे का सामना करना पड़ता है। इसी तरह के हालात स्वयं की भूमि पर खेती करने वाले किसानों के हैं। उत्पादन के लिए बिजली कनेक्शन, कृषि उपकरण और तमाम जरूरतों पर लंबे चौड़े खर्च के कारण कृषि से उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा।
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कलायत उप मंडल सिंचाई विभाग एसडीओ तरसेम गर्ग ने कहा कि किसानों और आम जन की जरूरत को देखते हुए सिंचाई संसाधनों में पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। क्षेत्र में पानी की समस्या नहीं रहेगी। इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा महत्वपूर्ण कदम हर स्तर पर उठाए जा रहे हैं। डीसी के साथ-साथ सिंचाई विभाग अधीक्षक अभियंता सहित तमाम अधिकारी सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने में लगे हैं।
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