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ग्रेड-पे के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए दिए नोटिस

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रजिस्ट्री की गड़बड़ी के मामले में की गई कार्रवाई के विरोध में पटवारियों ने लगातार दूसरे दिन हड़ताल करके राजस्व संबंधी काम ठप रखा। उन्होंने लघु सचिवालय में धरना देकर डीसी को मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा। पटवारियों का कहना है कि ग्रेड-पे के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए दिए उनको नोटिस दिए गए हैं।
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विदित रहे कि पूरे हरियाणा में सरकार ने रजिस्टरी गड़बड़ी मामले में अनेकों पटवारी, क्लर्क व तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई की है। जिसमें पटवारी कार्रवाई का ये तर्क देकर विरोध कर रहे हैं कि उनका रजिस्ट्री से कोई लेना-देना नहीं है। रजिस्ट्री तहसील कार्यालय द्वारा की जाती है। इसी कारण पटवारियों ने वीरवार और शुक्रवार को हड़ताल रखी। शुक्रवार को लघु सचिवालय परिसर में धरना दिया। इसके बाद डीसी को ज्ञापन सौंपा। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन जिला कैथल के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन की अध्यक्षता प्रधान दिलबाग सिंह ढुल ने की। इस मौके पर एसकेएस जिला प्रधान जरनैल सिंह, सचिव रामपाल शर्मा ने भी समर्थन किया। इस मौके पर फग्गु राम, विरेंद्र सिंह, अशोक कुमार, गुहला से राजेश सीड़ा, राजेश एडवोकेट, कृष्ण कुमार, पूंडरी से देवीदयाल समेत पटवारी मौजूद हैं।
पटवारी सुमित का कहना है कि सरकार ने ग्रेड-पे के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें बेवजह मोहरा बनाया है। पटवारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। जब उनका कुसूर ही नहीं है तो कार्रवाई क्यों की जा रही है?
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जिला कोषाध्यक्ष पटवारी सन्नी दयोल ने कहा कि पटवारी कम सुविधाओं में लगातार बढ़ते बोझ के बावजूद टीकाकरण हो या परिवार पहचान पत्र में विभिन्न तरह की जांच, प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर डीसी के निर्देशानुसार काम कर रहे हैं। निर्दोष पटवारियों को परेशान न किया जाए।
जिला उप-प्रधान राजेश ने कहा कि डीटीपी और संबंधित रजिस्ट्रार आफिस इसका जिम्मदार है। अवैध कॉलोनियां रोकना डीटीपी का काम है। पटवारियों का नहीं। जिला महासचिव सुखविद्र सिंह ने कहा कि पटवारी दिन रात काम करते हैं। पटवारियों की ग्रेड-पे की फाइल सरकार की टेबल पर पड़ी है। सरकार पटवारियों पर काम के बोझ को देखते हुए पे ग्रेड में वृद्धि करना तो दूर उल्टा पटवारियों को परेशान कर रही है।
स्टेट महासचिव दिलबाग सिंह पौलड़ ने कहा कि पटवारियों को बेवजह परेशान न किया जाए। जांच में आरोपी बनाए गए पटवारियों की लाल डोरा, पाविारिक हस्तांतरण व लोन की रजिस्ट्री भी शामिल हैं। सरकार बताए कि क्या इनमें एनओसी की जरूरत है। अगर नहीं तो फिर पटवारी पर कार्रवाई क्यों?
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