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शिक्षण के पहले कदम पर कायदे, कलम, दवात की कमी....

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कैथल। राजकीय स्कूलों में कोरोना काल के चलते बीते दो वर्ष से एससीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में स्कूलों में पहली कक्षा में नया दाखिला लेने वाले छोटे-छोटे बच्चों को प्रथम चरण में ही पुस्तकों की कमी खल रही है। शिक्षक या तो पुरानी पुस्तकों के सहारे प्राथमिक शिक्षण की गाड़ी को धक्का दे रहे हैं या बच्चों को समूहों में बैठाकर अक्षर ज्ञान देने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चे छोटे होने के कारण ये मांग रखने में भी सक्षम नहीं हैं कि उन्हें पढ़ने के लिए पुस्तकें, कलम और दवात उपलब्ध करवाई जाएं।
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विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष जनवरी में एससीईआरटी की कुछ पुस्तकें बच्चों के लिए जिले में आई थीं लेकिन वे भी तब मिलीं, जब परीक्षाएं सिर पर थीं। बच्चों को पुस्तकें बांटी भी गईं लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अब विभाग उन पुस्तकों को बच्चों से वापस लेकर दूसरे बच्चों को देने का प्रयास कर रहा है ताकि शिक्षण को आगे बढ़ाया जा सके। उन पुस्तकों में से भी कुछ तो बच्चों ने गुम कर दी हैं और कुछ फाड़ दी हैं। ऐसे में आधे से ज्यादा बच्चे पुस्तकों से वंचित हैं।
हालांकि अब तक पुस्तकों के संबंध में कोई सूचना अधिकारियों के पास नहीं आई है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जैसी भी पुस्तकें जिले में आती हैं, उन्हें तुरंत स्कूलों में भेजकर बच्चों को बांटा जाएगा। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि आखिर पुस्तकें कब तक पहुंचेंगी। प्रथम चरण में ही बच्चों की बिना पुस्तकों के पढ़ाई बाधित हो रही है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने बताया कि कोरोना काल के दौरान पुस्तकें प्रिंट नहीं होने के कारण समस्या रही। अब जल्द ही पुस्तकें पहुंचने की उम्मीद है। जैसे ही पुस्तकें आती हैं, तुरंत स्कूलों में भिवाकर बच्चों को बंटवाई जाएंगी।
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