तीर्थों की भूमि कैथल पर महान तीर्थ श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में जिले का पहला महारुद्र यज्ञ का आयोजन होगा। जिसमें नौ वेदियों पर 31 विद्वान मंत्रोच्चारण से पूरे शहर के वातावरण को सात्विक कर देंगे। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर योगी यतिंद्रानंद जी की देखरेख में काशी से आए 31 यज्ञ आचार्य इस हवन में पूरे विधि-विधान से मंत्रोच्चारण करेंगे। इसके लिए मंदिर प्रबंधक समिति ने पूरी योजना तैयार की हैं। जिसमें सबसे पहले अनंत श्री विभूषित परिव्राजकाचार्य महामंडलेश्वर पूज्य योगी यतीनं्द्रानन्द गिरी जी से मिलकर महारुद्र यज्ञ के आयोजन की पूरी विधि की जानकारी हासिल की।
मंदिर प्रांगण में मीडिया से बातचीत में प्रधान विनोद मित्तल व महासचिव डा. राजेश गोयल ने बताया कि पहली बार कैथल में महारुद्र यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस महारुद्र यज्ञ के आयोजन के लिए अलग से समिति बनाई गई है। यज्ञ का आयोजन कोरोना महामारी के खात्मे की कामना के बीच विश्व शांति, कैथल सहित प्रदेश व देश की उन्नति, सामाजिक सद्भाव की कामना से किया जा रहा है। जिसमें कैथल जिले की सभी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं को जोड़ा जाएगा। 23 फरवरी 2022 से 1 मार्च 2022 तक आयोजित होने वाले इस महारुद्र यज्ञ के लिए 101 देशी घी के टीन लगेंगे। साथ ही लगभग 31 मण हवन सामग्री लगेगी। पूरे शहर में यज्ञ के दौरान सिद्ध किए गए पंचमुखी रुद्राक्ष प्रसाद के तौर पर वितरित किए जाएंगे। यज्ञ के दौरान हर रोज महामंडलेश्वर यतीन्द्रानंद जी महाराज शिवस्तुति करेंगे। इसके अलावा काशी से आए यज्ञ आचार्य, उप-आचार्य व ब्राह्मण 9 वेदियों पर यजमानों के माध्यम से यज्ञ करवाएंगे। इन सभी विद्वानों सहित यजमानों के लिए भी नियमानुसार वस्त्रों व खाने-पीने व उनके रहने की व्यवस्था मंदिर समिति की ओर से की जाएगी। यज्ञ के लिए आयोजन समिति में प्रबंधक समिति के चीफ पैटर्न बहादुर सैनी, घनश्याम दास मित्तल, माई लाल सैनी, तुलसीदास सचदेवा, कोषाध्यक्ष राजगोयल, सदस्यों में अशोक सैनी, बीरभान जैन, भगत राम सैनी, इंद्रजीत सरदाना, डा. मुकेश अग्रवाल, रमेश गर्ग खाद वाले, राजकुमार गुप्ता, सुरेश मित्तल व सतनारायण मित्तल शामिल हैं। यज्ञ में उत्तरी भारत के पांच मुख्यमंत्रियों में हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निमंत्रण दिया जाएगा। साथ ही राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े अधिकारी यहां शिरकत करेंगे।
श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर देश के प्राचीन मंदिरों में से एक है। पूरे देश में काशी के बाद केवल कैथल में ही भगवान शिव के ग्यारह शिवलिंग एक ही जगह स्थापित हैं। इसी कारण इस मंदिर को ग्यारह रुद्री व कैथल शहर को छोटा काशी कहा जाता है। यहां मान्यता है कि इन रुद्रों की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के बाद उनकी मानसिक शांति के लिए भगवान शिव की आराधना के लिए करवाई थी। वर्तमान प्रबंधक समिति द्वारा पूरे मंदिर परिसर को ग्रेनाइट के पत्थरों से सजा दिया है। इस समय मंदिर में भगवान शिव के मंदिर के अलावा मां लक्ष्मी-श्री विष्णु जी, मां दुर्गा, भगवान श्रीराम दरबार सहित हनुमान जी की आकर्षक प्रतिमा स्थापित है। प्रधान ने कहा कि हवन यज्ञ में भगवान शिव की आराधना होगी। भगवान शिव की पूजा संपूर्ण सृजन के लिए लौकिक ऊर्जा का स्रोत है। महायज्ञ के सफल आयोजन में उन्होंने सभी लोगों को यथासंभव सहयोग करने की अपील की।