कैथल। सूडान में चल रहे गृहयुद्ध के बीच कैथल की बेटी दीक्षिता गुप्ता अपने पति और बेटी सहित वहां फंसी हुई है। उसके परिवार ने उसको सकुशल भारत लाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, गृह सचिव सहित अन्य नेताओं को ई-मेल के जरिए अवगत कराया है, लेकिन अभी तक परिवार के पास भारत सरकार की ओर से उनको किसी प्रकार का कोई आश्वासन नहीं मिला।
दीक्षिता के पिता सुशील कमार और माता शकुंतला ने बताया कि उनकी बेटी दीक्षिता की साढ़े तीन साल पहले जींद के अमन के साथ शादी हुई थी। उसकी एक ढाई साल की बेटी अनायशा है। उन्होंने बताया कि शादी होने के बाद ही उनकी बेटी और दामाद सूडान चले गए थे। उनका दामाद सूडान में पिछले 10 वर्षों से मेघा स्टील फैक्ट्री में मैनेजर के तौर पर कार्यरत है। वे छह माह में एक बार 10 दिन के लिए आते थे। इससे पहले वह दिसंबर 2022 में आए थे। उन्होंने कहा कि सूडान में गृहयुद्ध के चलते हालात गंभीर बने हुए हैं। सूडान के खारतूम में उनकी बेटी रहती थी, उस भवन के पास भी जमकर बमबारी हो रही है। बेटी, दामाद और ढाई साल की बच्ची अनायशा वहां से किसी तरह बचकर निकले, जो अब वहां से एक हजार किलोमीटर की दूरी पर हैं। वहां पर भी उनको सुरक्षा नहीं मिली है। दीक्षिता के भाई गौरव ने बताया कि उनके पास रविवार शाम को छह बजे थोड़ी देर के लिए उनकी बात हुई थी, जिसमें उन्होंने अपने आपको असुरक्षित बताया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक उनको निकालने के लिए संदेश भेजो, ताकि वह वहां से सुरक्षित भारत पहुंच सके। उन्होंने कहा कि उसकी बहन दीक्षिता और उसके जीजा अमन छह दिन तक अपने घर में ही रहे, उनके पास खाने के लिए सामान भी बहुत कम था। जब उनके आसपास बमबारी होने लगी तो उनको अपना घर छोड़ना पड़ा। इस दौरान उनके जीजा से पांच लाख पौंड भी लूट लिए गए। अब उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा सूडान में हजारों भारतीय फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से गुहार लगाई है कि सभी भारतीयों को सूडान से निकालकर भारत लाया जाए।