सफाई घोटाला मामले में आरोपियों ने फर्जी बिल बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया था। यहीं नही आरोपियों ने गांवों में सफाई के नाम पर फर्जी मस्टरोल दिखा बिल बनाए और आरोपी ठेकेदारों की फर्माें के खातों रुपये डाले थे। पहले तो फर्माें के खातों में रुपये डाल लिए जाते थे। इसके बाद इन्हें अपने-अपने खातों में डाल लेते थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खातों की जांच भी एसीबी की टीम की ओर से की गई थी। ऐसे में इन आरोपियों की प्रॉपर्टी की जांच को लेकर राजस्व विभाग से रिकॉर्ड मंगवाया गया था।
जिला परिषद सफाई घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने 151 पंचायतों में 400 लोगों के बयान लिए हैं। ये बयान आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले ही लिए थे जबकि इन बयानों के आधार पर ही कार्रवाई के दस्तावेज तैयार किए गए हैं। एसीबी की ओर से इन गांवों में पहुंचकर सफाई के लिए आई ग्रांट के तहत हुए काम को लेकर ही ग्रामीणों से जानकारी ली है। इसके साथ ही सफाई घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने जिला परिषद व राजस्व से रिकॉर्ड लेकर अपने कब्जे में कर लिया है।
एंटी करप्शन ब्यूराे की टीम इस मामले में लगातार आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। एसीबी के निदेशक अमिताभ ढिल्लो व अंबाला एसीबी थाना की एसपी समिति चौधरी के निर्देशों के तहत अब तक करीब ढाई करोड़ की रिकवरी की है। इसमें एक आरोपी की प्रॉपर्टी को भी अटैच किया गया है जबकि करीब डेढ़ करोड़ रुपये की राशि सभी आरोपियों से रिकवर की गई है। उनकी आमजन से अपील है कि यदि किसी भी विभाग में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना एसीबी के टोल फ्री नंबर या कार्यालय में पहुंचकर दे। इसके बाद दबिश देकर उचित कार्रवाई भ्रष्टाचारियों पर की जाएगी। -महेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर व प्रभारी, एसीबी कैथल।