(कैथल) पूंडरी। पुंडरी में प्राचीन एवं ऐतिहासिक पुंडरीक तीर्थ पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है। सरोवर के पश्चिमी तट के घाट पर अवस्थित सात मध्यकालीन मंदिर इस तीर्थ को भव्यता प्रदान करते हैं। कस्बावासियों के अनुसार पुंडरीक तीर्थ में पिछले लगभग तीन वर्षों से जल नहीं है। जिस कारण श्रद्धालु इस तीर्थ में स्नान के महत्व से वंचित हैं।
कस्बावासियों का कहना है कि अब पुंडरी का यह पवित्र तीर्थ जुआरियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। तीर्थ पर जगह-जगह समूहों में कुछ लोग ताश खेलते लोग सहज ही दिख जाते हैं। हालांकि पवित्र तीर्थ पर ताश खेलना सही नहीं है। अब कुछ दिनों से जल विहीन तीर्थ में युवा गिल्ली डंडा खेलते नजर आ रहे हैं। कस्बावासियों की जिला प्रशासन से मांग है कि इस तीर्थ में जल भरा जाए ताकि श्रद्धालु स्नान कर सकें। पुंडरीक नामक यह तीर्थ पूंडरी शहर में स्थित है। पुंडरीक तीर्थ का वर्णन महाभारत एवं वामन पुराण दोनों में ही मिलता है। महाभारत के अनुसार इस तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य पुंडरीक यज्ञ के फल को प्राप्त करता है।
वामन पुराण में इस तीर्थ का सेवन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को ही करने का विधान है। वामन पुराण में भी इस तीर्थ का सेवन करने वाले मनुष्य को उसी फल विशेष का अधिकारी बताया गया है। जिस फल विशेष का वर्णन महाभारत में है। इस तीर्थ में किया गया स्नान, जप, एवं श्राद्ध मोक्ष पद को देने वाला होता है।
35 एकड़ में फैला हुआ है पुंडरीक तीर्थ
पुंडरीक तीर्थ लगभग 35 एकड़ में फैला हुआ कुरुक्षेत्र भूमि में स्थित विशाल तीर्थों में से एक है। सरोवर के पश्चिमी तट पर घाट पर लगे हुए सात मध्यकालीन मंदिर हैं। इनमें दुर्गा मंदिर, प्राचीन गीता भवन, शिव मंदिर, राम मंदिर, हनुमान मंदिर, मंशा देवी मंदिर, ठंडीपुरी मदिर शामिल हैं। इन मंदिरों की आंतरिक बनावट में पौराणिक एवं महाकाव्यों के प्रसंगों पर आधारित भित्ति चित्र (दीवार पर बने चित्र)हैं। इनमें गोपियों के मध्य श्रीकृष्ण, मत्स्यावतार, नृसिंहावतार, शेषशाही विष्णु, हनुमान व शिव-पार्वती प्रमुख हैं। संवाद