कैथल। श्री कृष्ण गो संरक्षण धाम की गोशाला में भ्रष्टाचार के आरोप मामले में पटाक्षेप होने के बाद अब दूसरा पक्ष सामने आया है। इस मामले में बर्खास्त किए सचिव प्रदीप ने गोशाला कमेटी पर दूसरे बैंक खाते में राशि डालने का आरोप लगाया है। पूर्व सचिव प्रदीप सिंगला ने एक प्रतिष्ठान पर यह जानकारी दी है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नवंबर 2020 में फर्म एंड रजिस्ट्रार सोसायटी के रजिस्टर्ड हुई थी। इसके बाद मई 2022 में हरियाणा गो सेवा आयोग से गोशाला रजिस्टर्ड हुई, लेकिन श्री कृष्ण गो संरक्षण धाम सोसायटी के साथ एक अन्य ट्रस्ट आठ मई 2018 को भी चलाया जा रहा था। उन्हें यह जानकारी नहीं थी। वह सोसायटी में संस्थापक सदस्य और गर्वनिंग बॉडी में सात लोग सदस्य है। सचिव के पद पर वह रहे। अभी तक इनमें केवल नौ ही सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि अन्य सदस्यों को जोड़ने की कोशिश की गई तो वहां पर मौजूदा प्रधान ने फर्म एवं सोसायटी के रजिस्ट्रार को लिख दिया कि गोशाला में विवाद चला है। अब नए सदस्य नहीं बनाने हैं। इस विवाद को लेकर गोशाला में एक पंचायत भी हुई थी। इसमें उनके द्वारा आरोप लगाए थे, उन्हें कहा था कि दो भट्ठों से दो लाख 70 हजार ईंटें खरीदी। इनकी राशि करीब 15 लाख रुपये बनती है। पहले तो आपस में ही सवाल-जवाब किया। इसमें पूछा क्या इसका प्रस्ताव सोसायटी में डाला। वो ईंटें सोसायटी में खरीदी गई। उनका भुगतान भी बैंक में आरटीजीएस के माध्यम से भट्ठा कंपनी को किया। उन्हें इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
उन्होंने बताया कि 18 अगस्त की पंचायत में उन्हें सचिव के पद से बर्खास्त किया। इसका उन्होंने स्वागत किया।
पंचायत ने लिखित में अपना फैसला देने से पहले 17 अगस्त 2023 को लिखित में पंचायत ने लिया कि जो पंचायत का फैसला होगा, उसे स्वीकार करना होगा। गोशाला में सरकार और जनता का पैसा आ रहा है। उनके सवालों पर पंचायत ने आश्वासन दिया कि हर सवाल का जवाब वे लिखित में देंगे, लेकिन उन बातों का कोई जवाब नहीं मिला। गोशाला की कमेटी के नाम से ही ट्रस्ट चल रही है। गो सेवा आयोग की तरफ से 14 लाख 30 हजार 400 रुपये का सरकारी अनुदान मिला। यह अनुदान राशि ट्रस्ट के खाते में डाला।
यह है मामला
श्री कृष्ण गो संरक्षण धाम की गोशाला में प्रधान पर 25 लाख रुपये का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा था। इसमें प्रधान ने बिना अनुमति के ही रुपये लगाने का आरोप लगाया था। इन आरोपों के बाद 18 अगस्त को हुई पंचायत में प्रधान रामफल खुरानियां को क्लीन चिट दे दी थी। इसी पंचायत में ही सचिव प्रदीप सिंगला को पंचायत ने बर्खास्त कर दिया था।
श्री कृष्ण गो संरक्षण सेवा समिति के प्रधान रामफल खुरानियां ने कहा कि जो ग्रांट गो सेवा आयोग से आता है। उसके लिए पहले से ही ट्रस्ट बनी थी। ट्रस्ट कैथल में सबसे पहले रजिस्टर्ड हुआ। इसके बाद समिति बनाई। ट्रस्ट का खाता गो सेवा आयोग के पास पहले से ही था। जैसे ही राशि आती है तो इस पर लिखवा दिया कि यदि राशि ट्रस्ट के खाते में देने को लेकर कोई आपत्ति नहीं का पत्र लिया जाता है। पूरा लेखा-जोखा गोशाला कमेटी के पास है। प्रदीप को पहले ही जानकारी थी कि ट्रस्ट पहले बना है। गो सेवा के लिए तो उगाही की जाती थी तो उनसे कमीशन मांगता था, लेकिन ऐसा नहीं होने नहीं दिया। घर का खर्च चलाने व लेन-देन के लिए चार लाख रुपये ले गया था। दो लाख 30 हजार रुपये पंचायत होने के बाद दिए। 70 हजार रुपये देने की हामी भरी, बाकी एक लाख रुपये देने से मुकर गया।