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किसान बोले- वैकल्पिक डीएपी खरीदने के साथ थोपी जा रहे दवाई

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Farmers said - medicines are being imposed with the purchase of alternative DAP - फोटो : Kaithal
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जिले में डीएपी की किल्लत से जूझ रहे किसानों को अभी तक राहत नहीं मिल पाई है। किसानों ने कहा कि सहकारी खाद तो मांग के अनुसार मिल ही नहीं रहा है। ऐसे में वैकल्पिक डीएपी खरीदें तो वह महंगी बहुत है। प्रति बैग पर कम से कम 150 से लेकर 200 तक रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर उस डीएपी की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। किसान बलवान, रामकिशन, प्रताप व ऋषिपाल ने कहा कि कई डीएपी तो बिल्कुल रेत की तरह हैं। बिजाई करते समय दाने पिस जाते हैं। इससे गेहूं की फसल पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं होने वाला है।
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सहकारी एजेंसियों में पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं पहुंच पा रही है और वैकल्पिक खाद किसान खरीद नहीं रहे हैं। ऐसे में गेहूं की फसल की बिजाई करने के समय में भी किसानों को देरी हो रही है।
रविवार को इफ्को के खरीद केंद्र पर डीएपी लेने पहुंचे किसानों ने सहकारी और वैकल्पिक कंपनियों पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप जड़े। केंद्र पर किसानों की भीड़ लगी रही। जो डीएपी मौके पर पहुंचा, वह भी पुलिस चौकी में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में बंटवाया गया।
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किसानों ने बताया कि इफको या कृभको के डीएपी में वैकल्पिक डीएपी की अपेक्षा करीब दोगुनी नाइट्रोजन व फासफोरस हैं। इसमें नाइट्रोजन करीब 48 प्रतिशत होती है, लेकिन वैकल्पिक में डीएपी में 24, 20 या काफी में 15 प्रतिशत तक होती है। ये डीएपी महंगी होने के कारण भी किसान खरीद नहीं कर रहे हैं।
गांव ब्राह्मणीवाला से खाद लेने पहुंचे किसान कपिल ने बताया कि वैकल्पिक डीएपी वे इसलिए नहीं खरीद रहे, क्योंकि यह भरोसेमंद भी नहीं है। जिन किसानों ने ये डीएपी प्रयोग करके देखा है, सभी की प्रतिक्रिया विपरित रही है। सहकारी एजेंसियों का डीएपी भरोसेमंद है, लेकिन वो मिल नहीं रहा है।
गांव पाडला निवासी वजीर सिंह ने बताया कि एकाध किसान को ज्यादा मजबूरी में ही वैकल्पिक डीएपी खरीदना पड़ता है, लेकिन जैसे ही उसे मशीन में डालते हैं तो रेत की तरह हो जाता है। इसके दाम भी प्रति बैग 1350 से ज्यादा ही रहते हैं, जबकि सरकारी डीएपी 1200 रुपये बैग मिलता है।
मालखेड़ी निवासी शमशेर ने बताया कि दाम ज्यादा देने के बाद भी जब किसानों को सही सामान न मिले तो वे कैसे ले लें। कुछ कंपनियों का खाद मजबूरी में वे खरीद तो लेते हैं, लेकिन उसका परिणाम किसानों की उम्मीदों के अनुसार नहीं मिलता है।
गांव गुहणा निवासी बलवान ने कहा कि डीएपी के टोटे में वे वैकल्पिक डीएपी खरीद तो लें, लेकिन उसके साथ भी अनावश्यक शर्तें थोपी जा रही हैं। कभी दवाई तो कभी बीज की बिक्री साथ की जाती है। जिस चीज की उन्हें जरूरत ही नहीं है, उस पर वे अतिरिक्त रुपये क्यों खर्च करें? पास में बैठे अन्य किसानों ने भी उनकी इस बात का समर्थन किया।
उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिले में रविवार को 4 हजार बैग डीएपी पहुंचा, जो साथ के साथ किसानों को बांट दिया गया। सोमवार को 10 हजार बैग डीएपी पहुंच जाएगा और किसानों को बांटा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि खाद के साथ-साथ बीज या दवाई अनावश्यक बेचे जाने की उनके पास अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा है तो किसान शिकायत दे सकते हैं, ताकि कार्रवाई हो सके। साथ ही कहा कि सहकारी और वैकल्पिक डीएपी में कोई अंतर नहीं है। 17 पौषक तत्व पौधों के विकास के लिए जरूरी होते हैं। ये तत्व हर तरह के डीएपी में उपलब्ध हैं।
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